नई दिल्ली। एथेनॉल ब्लेंडिंग को लेकर उठ रहे सवालों के बीच केंद्र सरकार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस कार्यक्रम को वैज्ञानिक, पर्यावरण हितैषी और देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण बताया। सरकार ने कहा कि एथेनॉल मिश्रित ईंधन (E-20) का उद्देश्य प्रदूषण कम करना, कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाना और किसानों की आय बढ़ाना है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2014-15 में पेट्रोल में केवल 1.5 प्रतिशत एथेनॉल मिलाया जाता था, जबकि अब देश 20 प्रतिशत एथेनॉल ब्लेंडिंग (E-20) के लक्ष्य तक पहुंच चुका है। E-20 ईंधन में 20 प्रतिशत एथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण होता है।
सरकार के अनुसार, एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम पूरी तरह वैज्ञानिक अध्ययन और तकनीकी मानकों के आधार पर लागू किया जा रहा है। इससे वाहनों से निकलने वाले कार्बन उत्सर्जन में कमी आती है, जिससे वायु प्रदूषण नियंत्रित करने और जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने में मदद मिलती है।
सरकार ने यह भी कहा कि एथेनॉल का उत्पादन मुख्य रूप से गन्ना, मक्का तथा अन्य कृषि आधारित स्रोतों से होता है। इससे किसानों को अपनी उपज का अतिरिक्त बाजार मिलता है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है। साथ ही देश का विदेशी मुद्रा व्यय भी कम होता है क्योंकि पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता घटती है।
अधिकारियों ने बताया कि एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम के विस्तार के लिए तेल विपणन कंपनियों, वाहन निर्माताओं और कृषि क्षेत्र के बीच समन्वय स्थापित किया गया है। नई तकनीक वाले वाहनों को E-20 ईंधन के अनुरूप विकसित किया जा रहा है ताकि उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
सरकार ने दोहराया कि एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम का उद्देश्य स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देना, पर्यावरण संरक्षण, किसानों की आय में वृद्धि और भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में अधिक आत्मनिर्भर बनाना है।


