मेरठ
सदर बाजार थाना क्षेत्र स्थित तेली मोहल्ला में एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया, जिसने पूरे इलाके को हिला दिया। माध्यमिक शिक्षा परिषद से सेवानिवृत्त लिपिक 76 वर्षीय उदयभानु विश्वास अपनी 33 वर्षीय बेटी प्रियंका विश्वास के शव के साथ कई महीनों तक घर में रहते रहे। यह मामला तब सामने आया जब 10 अप्रैल की रात पुलिस ने उनके घर से प्रियंका का कंकाल बरामद किया। घटना के बाद पूरे मोहल्ले में सनसनी फैल गई और लोगों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। पुलिस की शुरुआती जांच में पता चला कि प्रियंका लंबे समय से बीमार थी और उसकी मौत कई महीने पहले हो चुकी थी, लेकिन पिता ने किसी को इसकी जानकारी नहीं दी।
जांच के दौरान उदयभानु विश्वास ने पुलिस को बताया कि उनकी बेटी प्रियंका पीलिया से पीड़ित थी। उन्होंने उसका इलाज कराने के बजाय झाड़-फूंक करने वाले लोगों की मदद ली। जब प्रियंका की मौत हो गई तो वह मानसिक रूप से टूट गए और उन्हें विश्वास था कि उनकी बेटी दोबारा जीवित हो सकती है। इसी उम्मीद में वह कई महीनों तक शव के पास बैठकर उससे बात करते रहे और उसे उठाने की कोशिश करते रहे। पुलिस के अनुसार, उदयभानु कई बार घर छोड़कर हरिद्वार भी गए, लेकिन बाद में फिर लौटकर उसी घर में रहने लगे। पड़ोसियों को लंबे समय तक इस घटना की जानकारी नहीं हो सकी क्योंकि वह किसी को घर के अंदर आने नहीं देते थे।
मामले का खुलासा तब हुआ जब रिश्तेदारों और पड़ोसियों को उदयभानु के व्यवहार पर शक हुआ। परिवार के लोगों ने उनसे प्रियंका के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि वह देहरादून में है। बाद में उन्होंने बताया कि वह घर में बंद है। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस और फॉरेंसिक टीम जब घर के अंदर पहुंची तो वहां का दृश्य बेहद भयावह था। घर में गंदगी और कूड़ा फैला हुआ था और कमरे में प्रियंका का कंकाल मिला। पुलिस ने मौके से जरूरी सबूत जुटाए और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। हालांकि, शव काफी पुराना होने के कारण मौत की सही तारीख और कारण स्पष्ट नहीं हो सके।
घटना के बाद पुलिस ने उदयभानु का मानसिक परीक्षण कराया। उन्हें मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विभाग में भर्ती किया गया था ताकि यह पता लगाया जा सके कि उनकी मानसिक स्थिति ठीक है या नहीं। बुधवार को डॉक्टरों की टीम ने उन्हें मानसिक रूप से सामान्य बताया और डिस्चार्ज कर दिया। इसके बाद पुलिस ने उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 239 और 271 के तहत प्राथमिकी दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया। धारा 239 के तहत किसी घटना या अपराध की जानकारी छिपाने और पुलिस को सूचित न करने पर कार्रवाई होती है, जबकि धारा 271 संक्रामक बीमारी फैलने के खतरे से संबंधित है। पुलिस का कहना है कि कई महीनों तक शव घर में रहने से आसपास बीमारी फैलने की आशंका थी।
इस घटना ने समाज में मानसिक स्वास्थ्य और अकेलेपन की समस्या को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पड़ोसियों के अनुसार, उदयभानु और उनकी बेटी काफी समय से अकेले रहते थे और घर की हालत भी खराब रहती थी। परिवार के करीबी लोगों का कहना है कि बेटी की मौत के बाद उदयभानु गहरे सदमे में चले गए थे और वास्तविकता को स्वीकार नहीं कर पा रहे थे। फिलहाल पुलिस ने आरोपी को अदालत में पेश करने की तैयारी कर ली है और मामले की आगे जांच जारी है। यह घटना न केवल कानून और व्यवस्था बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता की आवश्यकता को भी उजागर करती है।


