डिलीवरी बॉय और ड्राइवरों ने कंपनियों के खिलाफ खोला मोर्चा
“ईंधन महंगा, कमाई आधी” के नारों के साथ देशभर में विरोध
प्रति किलोमीटर 20 रुपये तय करने की उठी मांग
नई दिल्ली। देश में लगातार बढ़ती पेट्रोल-डीजल कीमतों के खिलाफ अब गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स भी खुलकर मैदान में उतर आए हैं। गिग एवं प्लेटफॉर्म सर्विस वर्कर्स यूनियन ने शुक्रवार को देशव्यापी विरोध प्रदर्शन का ऐलान करते हुए कहा है कि दोपहर 12 बजे से शाम 5 बजे तक हजारों डिलीवरी बॉय, कैब ड्राइवर और ऐप आधारित कर्मचारी अपने ऐप बंद रखेंगे।
यूनियन का कहना है कि ईंधन की बढ़ती कीमतों ने गिग वर्कर्स की कमर तोड़ दी है। पेट्रोल-डीजल महंगा होने के बाद उनकी रोजाना की बचत लगातार घटती जा रही है, जबकि कंपनियां प्रति किलोमीटर भुगतान और डिलीवरी चार्ज बढ़ाने को तैयार नहीं हैं।
यूनियन नेताओं के अनुसार सबसे ज्यादा असर उन युवाओं पर पड़ा है जो फूड डिलीवरी, बाइक टैक्सी और ऑनलाइन कैब सेवाओं से अपना घर चला रहे हैं। कई वर्कर्स का आरोप है कि पहले जहां एक दिन में अच्छा मुनाफा बच जाता था, अब पेट्रोल और वाहन खर्च निकालने के बाद हाथ में बेहद कम रकम बच रही है।
GIPSWU ने मांग उठाई है कि गिग वर्कर्स के लिए न्यूनतम 20 रुपये प्रति किलोमीटर सर्विस रेट तय किया जाए, ताकि बढ़ती महंगाई और ईंधन कीमतों का बोझ कुछ कम हो सके। यूनियन ने यह भी कहा कि कंपनियां करोड़ों का कारोबार कर रही हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर काम करने वाले डिलीवरी पार्टनर्स और ड्राइवरों की हालत लगातार खराब होती जा रही है।
देश के कई बड़े शहरों में इस विरोध का असर देखने को मिल सकता है। संभावना जताई जा रही है कि तय समय के दौरान फूड डिलीवरी, ऑनलाइन टैक्सी और अन्य ऐप आधारित सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।
महंगाई और ईंधन संकट के बीच गिग वर्कर्स का यह विरोध अब सरकार और बड़ी कंपनियों दोनों के लिए नई चुनौती बनता दिख रहा है।


