पैथोलॉजी लैब में हुई कुपोषित बच्चों के नाम बदलने की गड़बड़ी, इधर नहीं हुई कोई कार्रवाई
कुपोषित मासूम कनक की मां रूबी ने बताई पूरी हकीकत, बोली मुझसे नहीं की गई पूछताछ
फर्रुखाबाद। जनपद के डॉ राम मनोहर लोहिया चिकित्सालय में इन दिनों एक बड़ा प्रशासनिक विवाद सामने आया है। एनआरसी (पोषण पुनर्वास केंद्र) वार्ड में की गई कार्रवाई को लेकर मुख्य चिकित्सा अधिकारी दो अवनींद्र कुमार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि बिना उचित जांच-पड़ताल किए तीन कर्मचारियों का तबादला कर दिया गया, जिससे पूरे स्वास्थ्य विभाग में चर्चा का माहौल है।
मामला उस समय सामने आया जब अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अवनींद्र कुमार द्वारा एनआरसी वार्ड का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान एक प्राइवेट पैथोलॉजी लैब की रिपोर्ट के आधार पर सीएमओ ने तत्काल कार्रवाई करते हुए स्टाफ नर्स सौरभ सक्सेना, रीना स्मार्ट और आलोक का तबादला कर दिया। लेकिन बाद में यह तथ्य सामने आया कि जिस रिपोर्ट को आधार बनाया गया, वह पुरानी थी और भर्ती से पहले की थी।
जानकारी के अनुसार थाना मऊ दरवाजा क्षेत्र के बीबीगंज निवासी 19 माह की कनक को कुपोषण की शिकायत पर 13 मई 2026 को एनआरसी वार्ड में भर्ती कराया गया था। कनक की मां रूबी ने बताया कि 7 मई को परिजनों ने निजी पैथोलॉजी लैब में जांच कराई थी। ऐसे में सवाल यह उठता है कि भर्ती से पहले की रिपोर्ट के आधार पर अस्पताल स्टाफ पर कार्रवाई करना कितना उचित है।
मामले में एक और गंभीर लापरवाही सामने आई है। एनआरसी वार्ड में भर्ती अन्य कुपोषित बच्चों के ब्लड सैंपल लिए गए थे, लेकिन पैथोलॉजी लैब में बच्चों के नाम गलत दर्ज कर दिए गए। यदि सीएमओ ने इस गड़बड़ी को आधार बनाकर कार्रवाई की है, तो जिम्मेदारी पैथोलॉजी लैब कर्मचारियों की भी बनती है। इसके बावजूद अब तक लैब स्टाफ पर कोई कार्रवाई नहीं की गई, जिससे सीएमओ की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं।
विवाद को और बढ़ाने वाली बात यह है कि जिन कर्मचारियों का तबादला किया गया, उनकी जगह नर्स निधि मिश्रा, राखी और मोहिनी सिंह की तैनाती कर दी गई है। सूत्रों के अनुसार इन नियुक्तियों को लेकर भी पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं और आरोप है कि यह तैनाती सीएमओ की व्यक्तिगत इच्छा के आधार पर की गई है।
स्वास्थ्य विभाग में इस पूरे घटनाक्रम को लेकर असंतोष का माहौल है। कर्मचारी इसे नियम विरुद्ध कार्रवाई बताते हुए उच्च अधिकारियों से जांच की मांग कर रहे हैं। वहीं आम जनता भी यह जानना चाहती है कि आखिर बिना पूरी सच्चाई जाने इतनी बड़ी कार्रवाई क्यों की गई।


