बाराबंकी। प्रदेश में बाढ़ अब मौसमी आपदा नहीं बल्कि स्थायी संकट बनती जा रही है। फ्लड फ्रीक्वेंसी एनालिसिस-2026 रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है कि प्रदेश के 37 जिलों के 68 विकास खंडों के 439 गांव लगातार बाढ़ की चपेट में आ रहे हैं। वर्ष 2009 से 2025 तक किए गए अध्ययन में कई गांव ऐसे मिले जहां 17 वर्षों में 16 बार बाढ़ आई।
राहत आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद की रिपोर्ट के अनुसार बलरामपुर जिला सबसे अधिक प्रभावित जिलों में शामिल है। तुलसीपुर, हरैया सतघरवा और गैसड़ी ब्लॉक के जंबो दीप, लालाजोत, लिलवा, खजुरिया, सिंहवापुर और कैलाशगढ़ गांव हर साल बाढ़ की तबाही झेल रहे हैं। रिपोर्ट में आजमगढ़, बलिया, गोरखपुर, बहराइच, गोंडा, अयोध्या, अंबेडकरनगर और महाराजगंज को भी डेंजर जोन में रखा गया है।
बाराबंकी जिले में रामनगर, सिरौलीगौसपुर और सूरतगंज ब्लॉकों के कई गांव 14 बार तक बाढ़ से प्रभावित पाए गए। घाघरा, सरयू, राप्ती, शारदा, गंडक और गंगा नदी के किनारे बसे इलाकों में नेपाल से छोड़े गए पानी और भारी बारिश के कारण हालात गंभीर हो जाते हैं।
रिपोर्ट में अगस्त और सितंबर को सबसे संवेदनशील महीने बताया गया है। लगातार बारिश और नदियों के उफान से गांवों का संपर्क कट जाता है, हजारों हेक्टेयर फसलें बर्बाद होती हैं और लाखों लोग प्रभावित होते हैं। अध्ययन में यह भी सामने आया कि अब बाढ़ का खतरा केवल नदी किनारे के गांवों तक सीमित नहीं है, बल्कि शहरों में खराब ड्रेनेज सिस्टम, नालों पर अतिक्रमण और अनियोजित निर्माण के कारण जलभराव तेजी से बढ़ रहा है।
गोरखपुर, वाराणसी, बाराबंकी और कानपुर समेत कई जिलों में प्रशासन ने बचाव के लिए पूर्वाभ्यास शुरू कर दिया है। बाढ़ खंड के अधिशाषी अभियंता शशिकांत सिंह ने बताया कि फ्लड फ्रीक्वेंसी एनालिसिस-2026 रिपोर्ट के आधार पर राहत और बचाव की तैयारियां तेज कर दी गई हैं, जिससे बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में समय रहते सहायता पहुंचाई जा सके।


