ग्रामीणों ने जिलाधिकारी अंकुर लाठर से लगाई गुहार — “ऐतिहासिक धरोहर का कराया जाए जीर्णोद्धार”
अमृतपुर/फर्रुखाबाद: तहसील क्षेत्र के ग्राम कडहर में स्थित दो सौ वर्ष से अधिक पुराना ऐतिहासिक मंदिर आज बदहाली और उपेक्षा की मार झेल रहा है। करोड़ों की कीमत वाली लगभग 100 बीघा जमीन मंदिर के नाम दर्ज होने के बावजूद यह प्राचीन धार्मिक धरोहर जर्जर हालत में पहुंच चुकी है। टूटती दीवारें, झड़ता पलस्तर और दरकती छतें जिम्मेदारों की अनदेखी की कहानी बयां कर रही हैं।
कभी क्षेत्र की धार्मिक आस्था और गौरव का प्रतीक रहा यह मंदिर अब धीरे-धीरे खंडहर में तब्दील होता जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि मंदिर के नाम सैकड़ों बीघा भूमि होने के बावजूद वर्षों से संरक्षण और विकास के नाम पर कोई ठोस कार्य नहीं हुआ। न कोई ट्रस्ट बनाया गया और न ही मंदिर की आय-व्यय का सार्वजनिक विवरण सामने आया।
पूर्व प्रधान रामप्रताप सिंह के अनुसार मंदिर के नाम लगभग 100 बीघा भूमि दर्ज है, जो बारामऊ, शीशाला, पंचसाला, डीडवन और इस्माइलपुर सहित कई गांवों में फैली हुई है। उन्होंने बताया कि पहले प्रहलाद सिंह पुत्र भरत सिंह मंदिर के सरबराकर थे और वर्तमान में उनके पुत्र अर्जुन सिंह देखरेख कर रहे हैं।
मंदिर की प्राचीन स्थापत्य शैली आज भी लोगों को आकर्षित करती है। विशाल लकड़ी का मुख्य द्वार, मेहराबदार नक्काशी, गुंबदनुमा शिखर और मोटी प्राचीन दीवारें इसकी ऐतिहासिक भव्यता की गवाही देती हैं। मंदिर परिसर में बाबा भोलेनाथ का प्राचीन शिवलिंग और भगवान श्रीराम का राम दरबार स्थापित है, जिनसे क्षेत्र के हजारों लोगों की आस्था जुड़ी हुई है।
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी अंकुर लाठर से मांग उठाई है कि इस ऐतिहासिक मंदिर का जल्द जीर्णोद्धार कराया जाए, ताकि क्षेत्र की धार्मिक और ऐतिहासिक पहचान को बचाया जा सके। ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन गंभीरता दिखाए तो यह मंदिर पर्यटन और धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र बन सकता है। अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर मंदिर की सैकड़ों बीघा जमीन का लाभ किसे मिल रहा है और इस ऐतिहासिक धरोहर को बचाने के लिए जिम्मेदार अधिकारी कब जागेंगे?


