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Saturday, May 16, 2026

आबकारी विभाग की नाक के नीचे चल रहा किसके संरक्षण में ओवररेटिंग का खेल ?

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प्रिंट रेट से ज्यादा वसूली, समय से पहले दुकानें खुलने और देर रात बिक्री के आरोपों से मचा हड़कंप

अमृतपुर फर्रुखाबाद।

तहसील क्षेत्र में शराब दुकानों पर नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, लेकिन जिम्मेदार आबकारी विभाग आंखें मूंदे बैठा है। क्षेत्र की कई अंग्रेजी शराब दुकानों पर प्रिंट रेट से अधिक कीमत वसूले जाने, तय समय से पहले बिक्री शुरू करने और देर रात तक शराब बेचने के गंभीर आरोप लग रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि शिकायतों के बावजूद कोई कार्रवाई न होना विभागीय मिलीभगत की ओर इशारा कर रहा है। साथ कई अन्य दुकानों को लेकर क्षेत्र में लगातार चर्चाएं गर्म हैं। आरोप है कि दुकानों पर ग्राहकों से खुलेआम मनमाने दाम वसूले जा रहे हैं। शराब की बोतल और बीयर पर निर्धारित मूल्य से अधिक रकम ली जा रही है, जबकि विरोध करने वाले ग्राहकों को उल्टा धमकाने तक की बातें सामने आ रही हैं।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि शराब दुकानों पर बिक्री के तय सरकारी समय का भी पालन नहीं हो रहा। सूत्रों के मुताबिक कई दुकानें सुबह निर्धारित समय से पहले ही खुल जाती हैं और देर रात तक बिक्री जारी रहती है। सवाल यह है कि आखिर आबकारी विभाग की टीमों को यह सब दिखाई क्यों नहीं देता?
स्थानीय लोगों का कहना है कि आबकारी इंस्पेक्टर रीतु वर्मा को तत्काल फोन पर शिकायत की गई, लेकिन हालात जस के तस बने हुए हैं। इससे साफ जाहिर होता है कि या तो शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा या फिर पूरा मामला विभागीय संरक्षण में चल रहा है। क्षेत्र में यह चर्चा आम हो चुकी है कि बिना विभागीय मिलीभगत के इतनी बड़ी अनियमितता संभव नहीं।
ग्रामीणों का कहना है कि शराब दुकानों पर ओवररेटिंग का यह खेल लंबे समय से चल रहा है। हर दिन हजारों रुपये की अवैध वसूली की जा रही है और आम जनता मजबूरी में ज्यादा कीमत चुकाने को विवश है। लोगों का आरोप है कि आबकारी विभाग केवल कागजों में कार्रवाई दिखाकर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर लेता है, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।
क्षेत्रीय लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि अमृतपुर तहसील क्षेत्र की सभी शराब दुकानों की अचानक जांच कराई जाए, दुकानों पर सीसीटीवी फुटेज खंगाले जाएं और ओवररेटिंग करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई हो। साथ ही यह भी जांच हो कि आखिर किन अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से यह पूरा खेल धड़ल्ले से चल रहा है।
अब बड़ा सवाल यही है कि क्या आबकारी विभाग इस मामले में निष्पक्ष कार्रवाई करेगा या फिर शिकायतों को दबाकर शराब माफियाओं को खुली छूट मिलती रहेगी।

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