– गोपनीय भंग कर आंदोलनकारियों तक पहुंच रहीं अंदरूनी खबरें
– जिम्मेदारों की टेड़ी हुईं नजर, चिन्हित का किये जा रहे दागी
फर्रुखाबाद। कैंप कार्यालयों में इन दिनों गोपनीय सूचनाओं के लीक होने का मामला अंदरखाने बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है। सूत्रों के मुताबिक कार्यालयों के आसपास आज भी ऐसे कई संदिग्ध और दागी किस्म के लोग सक्रिय हैं, जिनकी पहुंच संवेदनशील सूचनाओं तक बताई जा रही है। यही लोग अंदरूनी जानकारियां बाहर पहुंचाने का माध्यम बन रहे हैं।
चर्चा है कि कुछ सेवानिवृत्त पुराने कर्मचारी और कथित करीबी चेहरे भी इस पूरे नेटवर्क में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। आरोप है कि विभागीय बैठकों, गोपनीय पत्राचार, प्रस्तावित कार्रवाई और प्रशासनिक रणनीतियों तक की जानकारी बाहर पहुंच रही है। यही वजह है कि कई बार बड़े कदम उठने से पहले ही आंदोलनकारी, दबाव समूह और विरोधी पक्ष पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतर जाते हैं।
सूत्र बताते हैं कि हाल के दिनों में कई संवेदनशील मामलों में गोपनीय सूचनाएं समय से पहले बाहर आने पर आला अधिकारियों ने गंभीर नाराजगी जताई है। कुछ मामलों में तो कार्रवाई से पहले ही संबंधित आपराधिक पक्षों तक सूचना पहुंचने से पूरी रणनीति प्रभावित हो गई। इससे प्रशासनिक गोपनीयता और सुरक्षा व्यवस्था दोनों पर सवाल उठ खड़े हुए हैं।
बताया जा रहा है कि अब इस पूरे मामले पर उच्च जिम्मेदारों की नजर टेढ़ी हो चुकी है। कैंप कार्यालयों में आने-जाने वाले लोगों की गतिविधियों, अनधिकृत बैठकों और संदिग्ध संपर्कों पर निगरानी बढ़ा दी गई है। अंदरखाने यह भी चर्चा है कि जल्द ही ऐसे लोगों की सूची तैयार की जा रही है, जिनकी भूमिका संदिग्ध पाई गई है।
प्रमुख गलियारों में यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि आखिर संवेदनशील कार्यालयों तक बाहरी और विवादित लोगों की पहुंच कैसे बनी हुई है? क्या कैंप कार्यालय अब जनसंपर्क केंद्र से ज्यादा ‘सूचना बाजार’ बनते जा रहे हैं?


