अमृतसर: किसान संगठनों (farmer organizations) ने एक बार फिर से केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। खाद संकट, बढ़ती महंगाई, भूमि अधिग्रहण और कृषि नीतियों के मुद्दे को लेकर किसान एकजुट हुए हैं। इस आंदोलन में बड़ी संख्या में किसान इकट्ठा हुए हैं। किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने कहा कि किसानों और आम लोगों के अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर देशभर में जागरूकता अभियान और विरोध प्रदर्शन (protest) चलाए जा रहे हैं।
पंजाब के 22 जिलों की 74 जगहों पर भी प्रदर्शन और जनसंपर्क अभियान आयोजित किए गए। सरवन सिंह पंधेर ने आरोप लगाया कि पंजाब में यूरिया खाद की भारी कमी बनी हुई है। उन्होंने कहा कि किसानों को खाद लेने के साथ अन्य गैर-जरूरी वस्तुएं खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
किसानो की बढ़ रही आर्थिक परेशानी आपको बता दें कि किसानों ने आरोप लगाया है कि कई स्थानों पर किसानों से अतिरिक्त पैसे वसूले जा रहे हैं, जिससे उनकी आर्थिक परेशानियां और बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि खेती से जुड़े आवश्यक संसाधनों की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, जिसका सीधा असर किसानों की आय पर पड़ रहा है। सभा को संबोधित करते हुए पंधेर ने विभिन्न राज्यों में किसानों की जमीनें अधिग्रहित किए जाने के मामलों पर भी चिंता जताई।
किसान नेता का कहना है कि भारत-अमेरिका कृषि समझौते का असर भी किसानों को देखने में मिलेगा। यदि ऐसा समझौता लागू होता है तो पंजाब की कृषि व्यवस्था और किसानों की आर्थिक स्थिति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने मांग की कि कृषि क्षेत्र को ऐसे समझौतों से बाहर रखा जाए। इसके अलावा उन्होंने पंजाब में चल रहे बेरोजगार, कर्मचारी और अन्य संगठनों के आंदोलनों के बारे में कहा कि प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग और दबाव की नीति बंद होनी चाहिए।


