– 2019 से परिवार पेंशन और बकाया भुगतान के लिए भटक रही बुजुर्ग महिला
– लोनिवि विभाग पर औपचारिक निस्तारण कर शिकायत बंद करने के आरोप
फर्रुखाबाद। वृद्ध विधवा श्रीमती मीना कुमारी सक्सेना के परिवार पेंशन प्रकरण में जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर की सख्ती के बाद मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। जिलाधिकारी ने लोक निर्माण विभाग से यह स्पष्ट जवाब मांगा है कि शिकायत संख्या 40015925020869 को विशेष रूप से बंद किस आधार पर किया गया।
जानकारी के अनुसार, श्रीमती मीना कुमारी सक्सेना वर्ष 2019 से अपने दिवंगत पति की परिवार पेंशन के सही निर्धारण, बकाया भुगतान एवं सेवा पुस्तिका से संबंधित जानकारी के लिए लगातार विभागीय कार्यालयों के चक्कर लगा रही हैं। उपलब्ध अभिलेखों में दिवंगत कर्मचारी का अंतिम पद “ट्रक चालक” दर्ज होने के बावजूद अब तक सही पेंशन निर्धारण की लिखित गणना उपलब्ध नहीं कराई गई है।
परिवार का आरोप है कि कई बार विभाग एवं कोषागार कार्यालय के चक्कर लगवाए गए और केवल मौखिक आश्वासन दिया जाता रहा कि पेंशन और बकाया राशि मिल जाएगी, लेकिन आज तक कोई लिखित आदेश अथवा गणना पत्र उपलब्ध नहीं कराया गया।
बताया जाता है कि मामले में पूर्व में नगर मजिस्ट्रेट द्वारा भी दो बार संबंधित विभाग को पत्र भेजे गए थे तथा तत्कालीन जिलाधिकारी द्वारा दूरभाष पर समाधान के निर्देश दिए गए थे, लेकिन इसके बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
सूत्रों के अनुसार, वर्तमान जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर द्वारा शिकायत बंद किए जाने पर जवाब मांगे जाने के बाद विभागीय स्तर पर हलचल तेज हो गई। इसके बाद लोक निर्माण विभाग कार्यालय से पीड़ित परिवार को फोन कर कार्यालय बुलाने का प्रयास किया गया। परिवार का कहना है कि उनसे कहा गया कि “जिलाधिकारी महोदया ने आपको संतुष्ट करने के लिए बुलाया है।”
हालांकि परिवार ने वृद्ध एवं अस्वस्थ महिला की स्थिति बताते हुए कहा कि सभी आवश्यक अभिलेख पहले ही उपलब्ध कराए जा चुके हैं। यदि विभाग के पास कोई निष्कर्ष, पेंशन गणना अथवा सेवा पुस्तिका संबंधी जानकारी है तो उसे लिखित रूप में उपलब्ध कराया जाए।
परिवार का आरोप है कि इसके बाद विभागीय स्तर से यह भी कहा गया कि यदि वे उपस्थित नहीं होते हैं तो यह दर्ज किया जाएगा कि शिकायतकर्ता जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं।
मामले का सबसे गंभीर पक्ष यह माना जा रहा है कि विभाग द्वारा आज तक सेवा पुस्तिका की वास्तविक स्थिति स्पष्ट नहीं की गई तथा शिकायतों का बार-बार औपचारिक निस्तारण कर उन्हें बंद किया जाता रहा।
अब जिलाधिकारी द्वारा स्वयं मामले में जवाब तलब किए जाने के बाद यह प्रकरण प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि शिकायत का वास्तविक समाधान किए बिना उसे बंद किया गया है, तो यह शिकायत निस्तारण व्यवस्था की पारदर्शिता एवं जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
पीड़ित परिवार ने मामले की निष्पक्ष जांच कर परिवार पेंशन का सही पुनर्निर्धारण, देय बकाया भुगतान तथा सेवा पुस्तिका की वास्तविक स्थिति स्पष्ट किए जाने की मांग की है।


