नई दिल्ली। देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आए पेपर लीक मामलों पर अंकुश लगाने की दिशा में केंद्र सरकार को बड़ी सफलता मिली है। लोकसभा ने मंगलवार को एंटी पेपर लीक बिल ध्वनिमत से पारित कर दिया। मानसून सत्र के दौरान इस विधेयक पर लंबी चर्चा हुई, जिसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। अब इस विधेयक के कानून बनने का रास्ता लगभग साफ हो गया है।
बिल पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सरकार पर परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित रखने में विफल रहने का आरोप लगाया और युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों को उठाया। इसके जवाब में केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने विपक्ष पर इस गंभीर विषय का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और युवाओं के भविष्य की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने राहुल गांधी के हालिया विरोध-प्रदर्शन का भी उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री आवास के बाहर उनका धरना राजनीतिक संदेश देने का प्रयास था। उन्होंने टिप्पणी की कि विपक्ष को इस संवेदनशील मुद्दे पर राजनीति करने के बजाय सार्थक सुझाव देने चाहिए।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विधेयक के ध्वनिमत से पारित होने की घोषणा की, जिसके बाद सदन की कार्यवाही अगले दिन तक के लिए स्थगित कर दी गई।
सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य पेपर लीक, संगठित नकल, परीक्षा माफिया और भर्ती परीक्षाओं में होने वाली धांधली पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करना है, ताकि लाखों युवाओं का भविष्य सुरक्षित रहे और भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता व विश्वास कायम हो सके। अब इस विधेयक पर राज्यसभा की मुहर के बाद इसे राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा।


