औरैया। जनपद में एक नाबालिग किशोरी ने साहस और जागरूकता का परिचय देते हुए अपनी ही शादी रुकवा दी। यह मामला फफूंद थाना क्षेत्र के गांव इटाहा नौली का है, जहां एक नाबालिग बालिका की शादी 5 मई 2026 को तय की गई थी। लेकिन बालिका पढ़ाई जारी रखना चाहती थी और उसने कानून व अपने अधिकारों को समझते हुए खुद प्रशासन से मदद मांग ली। उसकी इस पहल की अब हर ओर सराहना हो रही है।
जानकारी के अनुसार, किशोरी की जन्मतिथि उसके हाईस्कूल अंकपत्र में 5 जुलाई 2008 दर्ज है, जिससे वह अभी बालिग नहीं है। बावजूद इसके परिजन उसकी शादी कराने की तैयारी में जुटे हुए थे। शादी की तारीख नजदीक आते ही किसी अज्ञात व्यक्ति ने 24 अप्रैल को बाल कल्याण समिति औरैया को इसकी सूचना दी थी। शिकायत मिलते ही प्रशासन सतर्क हो गया और मामले की निगरानी शुरू कर दी गई।
शादी के दिन 5 मई को किशोरी ने खुद हिम्मत दिखाते हुए पुलिस और प्रशासन को फोन कर जानकारी दी कि वह अभी पढ़ना चाहती है और शादी के लिए तैयार नहीं है। इसके बाद जिला बाल संरक्षण इकाई की टीम, जिसमें संरक्षण अधिकारी रीना चौहान, परामर्शदाता सीमा कुशवाहा, चाइल्ड हेल्पलाइन के केसवर्कर अजय कुमार और थाना फफूंद पुलिस शामिल थी, तुरंत मौके पर पहुंच गई।
टीम ने गांव पहुंचकर परिजनों और रिश्तेदारों को बाल विवाह निषेध कानून की जानकारी दी और समझाया कि नाबालिग की शादी कराना दंडनीय अपराध है। अधिकारियों के समझाने पर परिजन मान गए और उन्होंने लिखित रूप से यह आश्वासन दिया कि बालिका के बालिग होने के बाद ही उसका विवाह किया जाएगा।
बताया गया कि शादी की सभी तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी थीं। घर में मेहमान जुट चुके थे और भोजन भी बन चुका था, लेकिन समय रहते प्रशासनिक हस्तक्षेप और बालिका की सूझबूझ से यह विवाह रुकवा दिया गया।
जिला प्रोबेशन अधिकारी ने बताया कि बाल विवाह को रोकने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है और लोगों को जागरूक किया जा रहा है। इससे पहले भी मार्च महीने में औरैया के मां मंगला काली मंदिर परिसर में एक बाल विवाह को रोका गया था।
इस घटना ने समाज को एक मजबूत संदेश दिया है कि बेटियां अब अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो रही हैं और शिक्षा को प्राथमिकता दे रही हैं। प्रशासन ने भी लोगों से अपील की है कि वे बाल विवाह जैसी कुप्रथा को खत्म करने में सहयोग करें और बच्चों को शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करें।


