लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को लखनऊ में मौसम की स्थिति, मानसून की प्रगति, पेयजल आपूर्ति तथा भूजल संरक्षण से जुड़े कार्यों की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रदेश के किसी भी क्षेत्र में पेयजल संकट की स्थिति उत्पन्न नहीं होनी चाहिए और जलापूर्ति व्यवस्था हर हाल में निर्बाध एवं सुचारु बनी रहे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मौसम की अनिश्चितता और संभावित कम वर्षा की परिस्थितियों को देखते हुए जल संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप दिया जाए। उन्होंने कहा कि पानी की एक-एक बूंद का संरक्षण किया जाना आवश्यक है तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर चलाए जा रहे ‘कैच द रेन’ अभियान को और अधिक प्रभावी ढंग से लागू किया जाए।
मुख्यमंत्री ने सिंचाई, पंचायती राज, भूगर्भ जल, नमामि गंगे, राजस्व तथा कृषि विभाग को आपसी समन्वय से जल संरक्षण और वर्षाजल संचयन के लिए समेकित कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस कार्ययोजना को जल संरक्षण, हरित ऊर्जा और आधुनिक सिंचाई तकनीकों से जोड़ा जाए, जिससे जल संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित हो सके।
बैठक में मुख्यमंत्री ने अमृत सरोवरों के संरक्षण, स्वच्छता और नियमित रखरखाव पर विशेष जोर दिया। साथ ही निर्देश दिए कि सभी सरकारी भवनों को वर्षाजल संचयन और जल संरक्षण के आदर्श मॉडल के रूप में विकसित किया जाए, ताकि समाज में जल बचाने के प्रति जागरूकता बढ़ सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आने वाले समय में जल संरक्षण ही सबसे बड़ी आवश्यकता है और इसके लिए सरकार तथा जनता को मिलकर काम करना होगा।


