रांची। झारखंड में लोक सेवा आयोग और कर्मचारी चयन आयोग की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का आंदोलन रविवार को 16वें दिन भी जारी रहा। सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच तीसरे दौर की करीब चार घंटे चली वार्ता में अधिकांश मांगों पर सहमति बनने का दावा किया गया, लेकिन संयुक्त स्नातक स्तरीय परीक्षा रद्द करने की मांग पर गतिरोध कायम रहा। छात्रों ने सोमवार को विधानसभा घेराव का ऐलान किया है।
सरकार की ओर से मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि छात्रों की करीब 98 प्रतिशत मांगों पर सहमति बनी है। 14वीं लोक सेवा आयोग प्रारंभिक परीक्षा तथा वर्ष 2023-25 की लंबित भर्तियों में कथित अनियमितताओं की आपराधिक जांच अपराध अनुसंधान विभाग से कराने तथा वित्तीय लेन-देन की जांच के लिए प्रवर्तन निदेशालय से अनुरोध करने की बात कही गई है। आरोपियों के खिलाफ 90 दिनों के भीतर आरोपपत्र दाखिल करने के लिए त्वरित न्यायालय बनाने और परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने का प्रस्ताव भी रखा गया है।
हालांकि, छात्रों की प्रमुख मांग कर्मचारी चयन आयोग की संयुक्त स्नातक स्तरीय परीक्षा रद्द करने को लेकर सहमति नहीं बन सकी। सरकार का कहना है कि यह परीक्षा उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के तहत हुई थी, इसलिए इसे रद्द करने का अधिकार सरकार के पास नहीं है। सरकार ने सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में निगरानी समिति बनाकर जांच कराने का प्रस्ताव दिया, लेकिन छात्र प्रतिनिधियों ने इसे स्वीकार नहीं किया।
छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो समेत कई अभ्यर्थी आंदोलन पर डटे हैं। महतो 2 अगस्त से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। रविवार को उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद चिकित्सकों की टीम ने मौके पर उपचार किया। भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों के वजन में भी कमी आई है।
इधर, लोक सेवा आयोग के तीन सदस्यों अजीता भट्टाचार्य, जमील अहमद और अनिमा हांसदा ने रविवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। राज्यपाल ने तीनों के इस्तीफे मंजूर कर लिए हैं।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि छात्रों को न्याय मिलेगा और भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। दूसरी ओर, आंदोलनकारी छात्र लिखित रूप से मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने पर अड़े हैं। सोमवार को प्रस्तावित विधानसभा घेराव को देखते हुए रांची में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।


