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Saturday, August 15, 2026

सिद्धांतों की राजनीति के जीवंत हस्ताक्षर : चंद्रभूषण सिंह ‘मुन्नू बाबू’

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– 80 की उम्र में भी नहीं छोड़ा लोककल्याण का पथ
– सीएम योगी, राजनाथ सिंह जैसे व्यक्तित्व आज भी देते सम्मान
– फिर भी कभी नहीं रखी किसी पद की चाह
फर्रुखाबाद।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में जहां दल-बदल, अवसरवाद और समझौतों की राजनीति लगातार बढ़ती जा रही है, वहीं फर्रुखाबाद की धरती पर एक ऐसा नाम आज भी सम्मान और सादगी के साथ लिया जाता है जिसने पूरी राजनीतिक यात्रा में सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। यह नाम है पूर्व सांसद चंद्रभूषण सिंह उर्फ “मुन्नू बाबू” का।
करीब आठ दशक की उम्र पार कर चुके मुन्नू बाबू आज भी अनुशासित दिनचर्या, स्पष्टवादिता और जनसेवा के प्रति समर्पण के कारण युवाओं और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा बने हुए हैं। राजनीति में सक्रिय रहते हुए उन्होंने कभी भी झूठ, दिखावे और व्यक्तिगत स्वार्थ की राजनीति को स्वीकार नहीं किया। यही कारण है कि विरोधी भी उनके व्यक्तित्व और सादगी का सम्मान करते दिखाई देते हैं।
उच्च कोटि की शिक्षा और बैज्ञानिक होते हुए भी अपना हित भूल समाज के लिए फर्रुखाबाद की राजनीति में ब्लॉक प्रमुख के रूप में सार्वजनिक जीवन की शुरुआत करने वाले चंद्रभूषण सिंह ने धीरे-धीरे खुद को एक मजबूत जननेता के रूप में स्थापित किया। गांव, किसान और आम कार्यकर्ता से सीधा संवाद उनकी सबसे बड़ी ताकत रहा। यही वजह रही कि वे क्षेत्रीय राजनीति से निकलकर देश की सर्वोच्च पंचायत लोकसभा तक पहुंचे और एक प्रबुद्ध सांसद के रूप में अपनी पहचान बनाई।इत्र की नगरी कन्नौज और फर्रुखाबाद से तीन बार सांसद रहे।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार मुन्नू बाबू की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि उन्होंने कभी भी सत्ता या अपने दल के दबाव में अपने सिद्धांत नहीं बदले। राजनीति में कई बार ऐसे अवसर आए जब समझौते कर वे बड़े पद हासिल कर सकते थे, लेकिन उन्होंने साफ छवि और ईमानदार राजनीति को प्राथमिकता दी। फर्रुखाबाद के बुजुर्ग राजनीतिक कार्यकर्ता बताते हैं कि “मुन्नू बाबू की राजनीति व्यक्ति आधारित नहीं बल्कि विचार आधारित रही है।”
लोकसभा के सदस्य के रूप में उन्होंने क्षेत्रीय समस्याओं को संसद तक मजबूती से उठाया। ग्रामीण सड़क, सिंचाई, शिक्षा और किसानों के मुद्दों पर उनकी सक्रियता चर्चा का विषय रही। राजनीतिक जीवन में उन पर गंभीर भ्रष्टाचार या निजी लाभ लेने के आरोप कभी प्रमुखता से नहीं उभरे, जो आज के दौर में बड़ी बात मानी जाती है।
उपलब्ध सार्वजनिक राजनीतिक आंकड़ों के अनुसार चंद्रभूषण सिंह उर्फ मुन्नू बाबू का जन्म 14 अक्टूबर 1944 को फर्रुखाबाद के धीरपुर मोहम्दाबाद में हुआ था। वे 13वीं और 14वीं लोकसभा के सदस्य रहे तथा समाजवादी विचारधारा से जुड़े रहे।
80 वर्ष की उम्र के बाद भी उनकी सक्रियता युवाओं को हैरान करती है। नियमित दिनचर्या, संयमित खानपान और अनुशासित जीवनशैली के कारण वे आज भी सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में भाग लेते दिखाई देते हैं। स्थानीय लोग बताते हैं कि वे आज भी आम लोगों से सहजता से मिलते हैं और क्षेत्र के मुद्दों पर लगातार रुचि लेते हैं।
फर्रुखाबाद की राजनीति में उन्हें “साफ छवि वाले जनप्रतिनिधि” के रूप में देखा जाता है। ऐसे समय में जब राजनीति में विश्वसनीयता का संकट गहराता जा रहा है, मुन्नू बाबू का जीवन यह संदेश देता है कि ईमानदारी, सादगी और सिद्धांत आधारित राजनीति आज भी संभव है।
“राजनीति में पद से बड़ा चरित्र होता है” — चंद्रभूषण सिंह ‘मुन्नू बाबू’ का सार्वजनिक जीवन इस बात का जीवंत उदाहरण माना जाता है। नई पीढ़ी के नेताओं के लिए उनका जीवन राजनीतिक अनुशासन और जनसेवा का महत्वपूर्ण अध्याय बन चुका है।

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