माफिया अनुपम दुबे के खिलाफ दर्ज कराए हैं मुकदमे
एक सुरक्षा कर्मी भी जीवन भय के कारण है तैनात
फर्रुखाबाद। थाना मऊ दरवाजा थाना क्षेत्र के अर्रा पहाड़पुर में करंट से अधेड़ की मौत के मामले ने अब सुनियोजित हत्या और जमीन माफिया की साजिश का रूप ले लिया है। घटना के बाद हनुमान ट्रस्ट के ट्रस्टी एकलव्य पुत्र रामलाल पर भी जानलेवा हमला किया गया, जिसमें उनका हाथ टूट गया। बेहोशी की हालत में उन्हें उनके घायल पुत्र माधव के साथ डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
परिजनों के अनुसार, घटना के बाद एकलव्य पर हमला किया गया। उकसाई की भीड़ में छिपे हमलावरों ने उन्हें बुरी तरह पीटा, जिससे उनका हाथ टूट गया, और जान जाते-जाते बची, घायल अवस्था में एकलव्य और उनके पुत्र माधव को इलाज के लिए लखनऊ रेफर किया गया। लोगों का कहना है कि यह हमला घटना से जुड़ी सच्चाई को दबाने की कोशिश है।
एकलव्य के बड़े भाई अमित कुमार पुत्र रामलाल ने पूरे मामले को पूर्व नियोजित साजिश बताया है। अमित का आरोप है कि माफिया अनुपम दुबे के भाई अनुराग दुबे उर्फ डब्बन,
अमित दुबे उर्फ बबन,
जिले में खुलेआम घूम रहे हैं और उन्हीं के इशारे पर यह पूरी घटना कराई गई है।
अमित कुमार का कहना है कि 15 दिन पहले हनुमान ट्रस्ट की जमीन का मुकदमा एकलव्य जीत चुके थे। चकबंदी अधिकारी अंतिम अभिलेख न्यायालय में फैसला ट्रस्ट के पक्ष में आया था और जिन अधिकारियों के फर्जी आदेश दिखाकर जमीन हड़पी गई थी, उन्होंने भी अदालत में बयान देकर स्पष्ट किया था कि आदेश की तारीख पर उनकी तैनाती जनपद में थी ही नहीं। इसके बाद माफिया और उसके भाइयों पर जालसाजी का एक और मुकदमा बनने की स्थिति पैदा हो गई थी।
अमित कुमार ने सीधा आरोप लगाया कि डब्बन दुबे ने करीब 20 लाख रुपये खर्च कर पूरी कहानी गढ़ी है। उनका कहना है कि यह लोग आपराधिक प्रवृत्ति के हैं और जमीन विवाद में फंसने के बाद बौखलाहट में इस घटना को अंजाम दिलाया गया।
करंट से मौत पर सवाल
अमित कुमार ने करंट से मौत के दावे पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि
यदि मौत करंट से होती,
तो मृतक के चेहरे और मुंह पर गंभीर चोटों के निशान नहीं होते।
उन्होंने आशंका जताई कि मृतक की मौत केवल करंट से नहीं, बल्कि मारपीट और साजिश का नतीजा हो सकती है।
परिजनों और ट्रस्ट से जुड़े लोगों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए,जमीन विवाद, फर्जी आदेश, करंट, मारपीट और ट्रस्टी पर हमले—इन सभी बिंदुओं को एक साथ जोड़कर जांच हो,
और दोषियों के खिलाफ हत्या, जालसाजी और साजिश की धाराओं में कार्रवाई की जाए।
फिलहाल पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मेडिकल रिपोर्ट और घटनास्थल से जुड़े तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच की जा रही है। लेकिन जिस तरह से जमीन माफिया, फर्जी आदेश और अब ट्रस्टी पर हमले के आरोप सामने आए हैं, उससे यह मामला अब सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि पूरी तरह संगठित अपराध की ओर इशारा कर रहा।






