प्रदेश में बिजली दर निर्धारण को लेकर जुलाई के पहले सप्ताह में नए टैरिफ की घोषणा होने की संभावना है। विद्युत नियामक आयोग की जनसुनवाई और राज्य सलाहकार समिति की बैठक के बाद नई दरें जारी की जा सकती हैं। बिजली कंपनियों ने वर्ष 2024-25 के ट्रू-अप और वर्ष 2026-27 के लिए कुल 16,448 करोड़ रुपये के राजस्व अंतर का हवाला देते हुए बिजली दरों में बढ़ोतरी की मांग की है। हालांकि आयोग के सूत्रों का कहना है कि इस बार बिजली दरों में वृद्धि की संभावना नहीं है, बल्कि उपभोक्ताओं को कई नई सुविधाएं और रियायतें मिल सकती हैं।
नई टैरिफ नीति में स्मार्ट मीटर को लेकर अहम फैसले लिए जा सकते हैं। पावर कॉरपोरेशन द्वारा उपभोक्ताओं से स्मार्ट मीटर की लागत वसूलने के लिए 3,838 करोड़ रुपये टैरिफ में शामिल करने की मांग की गई है, लेकिन आयोग इस प्रस्ताव को खारिज कर सकता है। साथ ही स्मार्ट मीटर की पारदर्शिता बढ़ाने के लिए चेक मीटर से जुड़े आंकड़ों को सार्वजनिक करने और स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने पर भी विचार किया जा रहा है। इसके अलावा 1912 हेल्पलाइन पर आने वाली शिकायतों के समयबद्ध निस्तारण के लिए भी सख्त नियम लागू किए जा सकते हैं।
आयोग घरेलू परिसरों में छोटी दुकान चलाने वाले उपभोक्ताओं को राहत देने पर भी विचार कर रहा है। वर्तमान में ऐसे मामलों में वाणिज्यिक बिजली कनेक्शन लेना अनिवार्य होता है, लेकिन नए टैरिफ में इस व्यवस्था में बदलाव संभव है। वहीं बहुमंजिला इमारतों में बिजली कनेक्शन देने के नियमों को भी सरल बनाने की तैयारी है, जिससे शहरी उपभोक्ताओं को अधिक सुविधा मिल सकेगी।
जुलाई से ईंधन अधिभार (एफपीपीसीए) की गणना भी नए मानकों के अनुसार की जाएगी। विद्युत नियामक आयोग ने पिछले 14 महीनों से अपनाई जा रही गणना पद्धति को गलत ठहराते हुए पॉवर कॉरपोरेशन को पारदर्शी और नियमानुसार प्रक्रिया अपनाने के निर्देश दिए हैं। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद का दावा है कि गलत गणना के कारण उपभोक्ताओं से लगभग 2,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त वसूली हुई है, जिसे वापस दिलाने के लिए आयोग में प्रस्ताव दाखिल किया गया है। इसके साथ ही स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं के जून 2026 के बिजली बिल के भुगतान की अंतिम तिथि बढ़ाकर 29 जून कर दी गई है, ताकि अधिक से अधिक उपभोक्ता समय पर बिल जमा कर सकें।


