पटना। बिहार सरकार ने सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था को सुधारने और शिक्षकों की जवाबदेही बढ़ाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए सरकारी विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के निजी कोचिंग संस्थानों, कमर्शियल शिक्षण केंद्रों और होम ट्यूशन से जुड़ने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है। आदेश के बाद राज्य भर के हजारों शिक्षकों में हलचल मच गई है।
शिक्षा विभाग का मानना है कि बड़ी संख्या में शिक्षक विद्यालयी समय के बाद निजी कोचिंग और ट्यूशन में व्यस्त रहते हैं, जिससे उनकी ऊर्जा और ध्यान सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों पर अपेक्षित रूप से केंद्रित नहीं हो पाता। इसी को देखते हुए विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि सरकारी शिक्षक अब किसी भी निजी कोचिंग संस्थान में पढ़ाते हुए नहीं पाए जाने चाहिए।
नए निर्देश के अनुसार यदि कोई सरकारी शिक्षक निजी कोचिंग, कमर्शियल शिक्षण केंद्र या घर पर ट्यूशन पढ़ाते हुए पाया जाता है तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। शिक्षा विभाग ने जिला शिक्षा पदाधिकारियों और संबंधित अधिकारियों को निगरानी बढ़ाने तथा शिकायत मिलने पर तत्काल जांच के निर्देश दिए हैं।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार का यह कदम सरकारी विद्यालयों में शिक्षण गुणवत्ता सुधारने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। लंबे समय से यह आरोप लगता रहा है कि कुछ शिक्षक स्कूलों की अपेक्षा निजी कोचिंग को अधिक महत्व देते हैं, जिससे सरकारी स्कूलों की पढ़ाई प्रभावित होती है।
हालांकि शिक्षकों के कुछ संगठनों का कहना है कि सरकार को प्रतिबंध लगाने के साथ-साथ शिक्षकों की सेवा शर्तों, कार्यभार और आर्थिक जरूरतों पर भी विचार करना चाहिए। वहीं शिक्षा विभाग का तर्क है कि सरकारी वेतन प्राप्त करने वाले शिक्षकों की पहली और सबसे बड़ी जिम्मेदारी विद्यालय के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है।
बिहार सरकार के इस फैसले को शिक्षा व्यवस्था में अनुशासन और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि विभाग इस आदेश का पालन किस हद तक सुनिश्चित कर पाता है और इसका सरकारी स्कूलों की पढ़ाई पर कितना असर पड़ता है।


