फर्रुखाबाद । शिक्षा के साथ वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने की दिशा में आर्मी पब्लिक स्कूल, फतेहगढ़ ने एक सराहनीय पहल करते हुए खगोल विज्ञान विषय पर ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक व्याख्यान का आयोजन किया। इस कार्यक्रम ने न सिर्फ छात्रों को अंतरिक्ष की दुनिया से रूबरू कराया, बल्कि प्राचीन भारतीय ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के बीच सेतु भी स्थापित किया।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता अमृतांशु वाजपेयी रहे, जो प्रोजेक्ट सप्तऋषि (ग्लोबल स्काई पार्टनर्स प्रोग्राम, लास कुम्ब्रेस ऑब्ज़र्वेटरी) के प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर और आरआईई एनसीईआरटी भोपाल के स्टेम विशेषज्ञ हैं। उन्होंने अपने व्याख्यान में छात्रों को खगोल विज्ञान की जटिल अवधारणाओं को बेहद सरल और रोचक तरीके से समझाया, जिससे छात्रों में विज्ञान के प्रति नई जिज्ञासा पैदा हुई।
कार्यक्रम की शुरुआत कक्षा IX ‘A’ के छात्र यश शुक्ला और छात्रा सिमरित जैन द्वारा अतिथि के स्वागत से हुई। इसके बाद कार्यवाहक प्रधानाचार्य नितिन चतुर्वेदी ने अपने संबोधन में कहा कि इस प्रकार के शैक्षणिक कार्यक्रम छात्रों के समग्र विकास के लिए अत्यंत आवश्यक हैं और यह उन्हें किताबों से आगे सोचने की प्रेरणा देते हैं।
अपने व्याख्यान के दौरान अमृतांशु वाजपेयी ने ‘कालचक्र’ की अवधारणा को विस्तार से समझाया और बताया कि किस तरह प्राचीन भारतीय पंचांग वैज्ञानिक आधार पर निर्मित था। उन्होंने यूनानी कैलेंडर से इसकी तुलना करते हुए यह स्पष्ट किया कि भारत की प्राचीन सभ्यताओं में भी गहरी वैज्ञानिक समझ मौजूद थी, जो खगोलीय घटनाओं के आधार पर समय निर्धारण करती थीं।
कार्यक्रम का संचालन और समन्वयन पीजीटी कंप्यूटर साइंस महेश उपाध्याय ने किया, जिन्होंने तकनीकी पहलुओं को छात्रों के सामने बेहद प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के अंत में छात्रों को खगोल विज्ञान प्रयोगशाला का भ्रमण कराया गया, जहां उन्होंने आधुनिक उपकरणों को करीब से देखा और समझा।
इस दौरान छात्रों को स्टेल्लारियम और गूगल स्काई मैप जैसे सॉफ्टवेयर के बारे में जानकारी दी गई, जिनकी मदद से वे रात के आसमान में तारों और नक्षत्रों की पहचान कर सकते हैं। छात्रों ने पूरे सत्र में उत्साहपूर्वक भाग लिया और कई जिज्ञासापूर्ण प्रश्न पूछकर अपनी सक्रियता दिखाई।
यह आयोजन न केवल एक शैक्षणिक कार्यक्रम रहा, बल्कि छात्रों के भीतर वैज्ञानिक दृष्टिकोण, तार्किक सोच और अंतरिक्ष के प्रति आकर्षण को मजबूत करने वाला साबित हुआ। आर्मी पब्लिक स्कूल की यह पहल यह दर्शाती है कि यदि सही दिशा और अवसर मिले, तो छोटे शहरों के छात्र भी बड़े सपनों को छूने की क्षमता रखते हैं।


