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Saturday, May 9, 2026

हरे-भरे अशोक के पेड़ की अवैध कटाई, वन विभाग ने दर्ज कराई प्राथमिकी

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आगरा
दयालबाग क्षेत्र में एक हरे-भरे अशोक के पेड़ को अवैध रूप से काटे जाने का मामला सामने आया है। पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोगों ने इस घटना पर गहरी नाराजगी जताई है। बताया गया कि वैभव कुंज कॉलोनी में सड़क किनारे लगा वर्षों पुराना अशोक का पेड़ अचानक काट दिया गया। मामले की जानकारी मिलने के बाद पर्यावरणविद् अपूर्व शर्मा ने आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद वन विभाग ने जांच शुरू की। जांच में शिकायत सही पाए जाने पर थाना न्यू आगरा में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।
वन विभाग के वनरक्षक अखिलेश के अनुसार, शिकायत में कहा गया था कि वैभव कुंज स्थित मकान नंबर 8 के सामने सड़क किनारे लगभग 85 सेंटीमीटर गोलाई वाला हरा-भरा अशोक का पेड़ लगा हुआ था। इस पेड़ को करीब दो फुट की ऊंचाई से काट दिया गया और उसकी लकड़ी भी मौके से गायब कर दी गई। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों और पर्यावरण संरक्षण कानूनों का उल्लंघन है। साथ ही यह उत्तर प्रदेश वृक्ष संरक्षण अधिनियम 1976 की धारा 4 और 10 के तहत दंडनीय अपराध भी है।
मामले में वैभव कुंज निवासी पंकज अग्रवाल पर पेड़ कटवाने का आरोप लगाया गया है। पुलिस और वन विभाग संयुक्त रूप से पूरे मामले की जांच कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वन विभाग यह भी पता लगाने में जुटा है कि पेड़ काटने के लिए किसी प्रकार की अनुमति ली गई थी या नहीं। शुरुआती जांच में ऐसी कोई अनुमति सामने नहीं आई है।
दयालबाग और आसपास के क्षेत्रों में हाल के महीनों में पेड़ों की अवैध कटाई के कई मामले सामने आ चुके हैं। ताज ट्रेपेजियम जोन (TTZ) क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण को लेकर पहले से ही सख्त नियम लागू हैं, इसके बावजूद हरे पेड़ों की कटाई रुक नहीं रही है। पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि लगातार हो रही कटाई से क्षेत्र की हरियाली और पर्यावरण संतुलन पर गंभीर असर पड़ रहा है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई कर भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लगाई जाए।
कानून के अनुसार, बिना अनुमति हरे पेड़ों की कटाई करने पर तीन महीने से एक साल तक की जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान है। कुछ मामलों में प्रति पेड़ एक लाख रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ते प्रदूषण और गर्मी के दौर में पेड़ों का संरक्षण बेहद जरूरी है। ऐसे में पेड़ों की अवैध कटाई न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के पर्यावरणीय भविष्य के लिए भी गंभीर खतरा है।

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