
प्रो. एच. एन. शर्मा
भारतीय राजनीति में समय-समय पर ऐसे नेता उभरते रहे हैं जिन्होंने केवल चुनाव नहीं जीते, बल्कि एक पूरी पीढ़ी को दिशा देने का काम किया। पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर को देश ने “युवा तुर्क” के रूप में पहचान दी। वे ऐसे नेता थे जिन्होंने युवाओं, छात्रों और सामाजिक परिवर्तन की राजनीति को राष्ट्रीय विमर्श का हिस्सा बनाया। आज यदि वर्तमान राजनीति में किसी नेता ने संगठन, सत्ता और रणनीति के माध्यम से युवा नेतृत्व को आगे बढ़ाने का सबसे बड़ा प्रयास किया है तो वह केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह हैं।
चंद्रशेखर का मानना था कि किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी पूंजी उसकी युवा शक्ति होती है। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में युवाओं को लोकतंत्र की धुरी बताया और शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम माना। बलिया की धरती से निकलकर प्रधानमंत्री पद तक पहुंचने वाले चंद्रशेखर ने हमेशा युवा चेतना को जगाने का प्रयास किया। उनकी पदयात्राएं, उनके भाषण और उनके राजनीतिक संघर्ष आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा माने जाते हैं।
लेकिन यदि वर्तमान दौर की राजनीति पर नजर डालें तो युवाओं को संगठन और सत्ता के केंद्र में लाने की सबसे प्रभावी रणनीति अमित शाह के नेतृत्व में दिखाई देती है। एक साधारण कार्यकर्ता से देश की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और फिर देश के गृह मंत्री बनने तक का उनका सफर करोड़ों युवाओं के लिए प्रेरणा का विषय है। भाजपा जैसा विशाल संगठन किसी व्यक्ति को केवल राजनीतिक समीकरणों के आधार पर नहीं सौंपता। नितिन नवीन को बीजेपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाना स्वयं इस बात का प्रमाण है कि पार्टी युवा ऊर्जा, संगठन क्षमता और परिणाम देने वाली नेतृत्व शैली पर भरोसा कर रही थी।
अमित शाह ने भाजपा की राजनीति को केवल चुनावी जीत तक सीमित नहीं रखा बल्कि संगठन विस्तार का ऐसा मॉडल तैयार किया जिसमें बूथ स्तर का कार्यकर्ता भी स्वयं को नेतृत्व की मुख्यधारा का हिस्सा महसूस करे। यही कारण है कि उनके कार्यकाल में लाखों युवाओं ने भाजपा और उसके विभिन्न संगठनों से जुड़कर राजनीतिक भागीदारी का रास्ता चुना।
युवा नेतृत्व पर अमित शाह के विश्वास का सबसे बड़ा उदाहरण राज्यों में दिखाई देता है। उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपे जाने का निर्णय हो या मध्य प्रदेश में मोहन यादव जैसे अपेक्षाकृत कम चर्चित लेकिन संगठननिष्ठ नेता को प्रदेश की कमान देना, इन फैसलों ने स्पष्ट संदेश दिया कि भाजपा भविष्य की राजनीति को नई पीढ़ी के हाथों में सौंपने की तैयारी कर रही है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आज देश के सबसे प्रभावशाली मुख्यमंत्रियों में गिने जाते हैं। वहीं मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री का चयन इस बात का संकेत था कि संगठन में वर्षों तक काम करने वाले नेताओं को भी शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचने का अवसर मिल सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन निर्णयों के पीछे अमित शाह की संगठनात्मक सोच और नेतृत्व निर्माण की दीर्घकालिक रणनीति की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
यही नहीं, भाजपा में पिछले एक दशक के दौरान सांसदों, विधायकों, जिला अध्यक्षों और संगठन पदाधिकारियों के रूप में बड़ी संख्या में युवा चेहरों को अवसर मिला है। भारतीय जनता युवा मोर्चा से निकले अनेक कार्यकर्ता आज राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर की राजनीति में प्रभावी भूमिका निभा रहे हैं। यह परिवर्तन अचानक नहीं आया बल्कि इसके पीछे अमित शाह की वह रणनीति है जिसमें संगठन को निरंतर नई पीढ़ी से जोड़े रखने पर विशेष बल दिया गया।
आज देश की लगभग 65 प्रतिशत आबादी 35 वर्ष से कम आयु की है। भारत दुनिया के सबसे युवा देशों में शामिल है। ऐसे में राजनीति का भविष्य भी युवाओं की आकांक्षाओं, उनकी शिक्षा, रोजगार, कौशल विकास और नेतृत्व क्षमता पर निर्भर करेगा। अमित शाह ने अपने राजनीतिक अभियानों में बार-बार इस युवा शक्ति को भाजपा की सबसे बड़ी ताकत बताया है।
हाल के वर्षों में विभिन्न छात्र आंदोलनों और युवा अभियानों ने राष्ट्रीय राजनीति को प्रभावित किया है। लेकिन यह भी सच है कि अनेक आंदोलनों में छात्र हितों से अधिक राजनीतिक दलों की वैचारिक लड़ाई प्रमुख दिखाई देती है। ऐसे समय में युवाओं को केवल आंदोलन का हिस्सा बनाने के बजाय उन्हें नेतृत्व, प्रशासन और नीति निर्माण में भागीदार बनाना अधिक महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
युवा तुर्क चंद्रशेखर ने जिस भारत का सपना देखा था, उसमें शिक्षित, जागरूक और राजनीतिक रू…


