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Tuesday, May 5, 2026

प्रदूषण से पीड़ित है श्वास, अस्थमा पर समाज की जिम्मेदारी

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सांसें……जीवन की सबसे स्वाभाविक प्रक्रियाजिसे हम तब तक महसूस नहीं करते जब तक वह कठिन न हो जाए। विश्व अस्थमा दिवस हमें इसी मूलभूत अधिकार स्वच्छ और सहज श्वास की अहमियत का एहसास कराता है। आधुनिक जीवनशैलीबढ़ता वायु प्रदूषण और बदलते पर्यावरणीय हालात ने अस्थमा को एक गंभीर वैश्विक स्वास्थ्य चुनौती बना दिया है।

अस्थमा केवल एक रोग नहींबल्कि एक ऐसी स्थिति है जो व्यक्ति के दैनिक जीवनउसकी कार्यक्षमता और मानसिक स्थिति पर गहरा प्रभाव डालती है। धूलधुआंपरागकणठंडी हवा और रसायनों का बढ़ता संपर्क इस बीमारी को और जटिल बना देता है। शहरों में फैलता प्रदूषण और गांवों में पारंपरिक ईंधनों का उपयोग दोनों ही इस समस्या को बढ़ावा देते हैं। जरूरत केवल उपचार की नहींबल्कि जागरूकता और रोकथाम की है। समय पर पहचाननियमित दवासंतुलित जीवनशैली और स्वच्छ वातावरण ये चार स्तंभ अस्थमा नियंत्रण के आधार हैं। लेकिन यह तभी संभव हैजब समाज और शासन मिलकर वायु गुणवत्ता सुधारने की दिशा में ठोस कदम उठाएं।

हर नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह पर्यावरण संरक्षण को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाए। यह भी समझना जरूरी है कि अस्थमा से ग्रसित व्यक्ति किसी दया का पात्र नहींबल्कि संवेदनशील सहयोग का अधिकारी है। उन्हें सामान्य जीवन जीने का अवसर और आत्मविश्वास देना समाज का दायित्व है। स्कूलोंकार्यस्थलों और सार्वजनिक स्थानों पर ऐसे वातावरण का निर्माण किया जाना चाहिएजहां वे बिना भय के सांस ले सकें। विश्व अस्थमा दिवस केवल एक जागरूकता अभियान नहींबल्कि एक सामूहिक संकल्प है ऐसे भविष्य के निर्माण काजहां हर व्यक्ति खुलकरबिना किसी बाधा के सांस ले सके।

 

सांसों में घुला धुआंजीवन को बांधता है,

हर श्वास में छिपा संघर्षमन को साधता है।

स्वच्छ हवा का हक मिलेयही हमारी आस,

हर दिल में बस एक पुकार मुक्त हो हर सांस।।

 

– सुरेश सिंह बैस “शाश्वत”एवीके न्यूज सर्विस

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