– कई पुलिसकर्मी और पत्रकार भी हुए घायल
– जीरो टॉलरेंस नीति को चुनौती देने की साजिश
– डीएम, एसपी को बदनाम करने के षड्यंत्र
फर्रुखाबाद। जिले में अपराध और माफिया तंत्र के खिलाफ चल रही सख्त कार्रवाई के बीच शनिवार थाना राजेपुर क्षेत्र में पुलिस टीम पर हुआ हमला कई गंभीर सवाल खड़े कर गया है। हमले में थाना प्रभारी समेत कई पुलिसकर्मी घायल हुए हैं, जबकि मौके पर कवरेज कर रहे कुछ पत्रकारों के भी चोटिल हुए हैं । घटना के बाद पुलिस महकमे में भारी आक्रोश है और पूरे मामले को कानून व्यवस्था को खुली चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार पुलिस टीम एक विवादित मामले में कार्रवाई करने पहुंची थी, अपराधियों के आकाओं के इशारे पर तभी अचानक भीड़ ने उग्र रूप ले लिया और पुलिस टीम पर पथराव शुरू हो गया। हालात इतने बिगड़ गए कि मौके पर अफरा-तफरी मच गई। हमले में कई पुलिसकर्मी घायल हुए, जिनमें कुछ को गंभीर चोटें आई हैं। मौके पर मौजूद पत्रकार भी हिंसा की चपेट में आ गए।
घटना के बाद जिले में यह चर्चा तेज हो गई है कि हाल के महीनों में पुलिस प्रशासन द्वारा अवैध खनन, भूमाफिया, जुआ-सट्टा, अवैध कारोबार और अपराधियों पर लगातार शिकंजा कसने से कई सफेदपोश और आपराधिक गठजोड़ बौखलाए हुए हैं। माना जा रहा है कि जीरो टॉलरेंस नीति के तहत चल रही सख्त कार्रवाई से प्रभावित तत्व अब पुलिस पर दबाव बनाने और माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं।
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि कानून व्यवस्था को चुनौती देने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होना जरूरी है, क्योंकि यदि पुलिस टीम ही सुरक्षित नहीं रहेगी तो आम नागरिक की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े होंगे। संविधान और कानून के तहत पुलिस पर हमला केवल सरकारी कार्य में बाधा नहीं, बल्कि राज्य की कानून व्यवस्था को चुनौती माना जाता है।
घटना के बाद पुलिस प्रशासन ने आरोपियों की पहचान शुरू कर दी है। वीडियो फुटेज, मोबाइल रिकॉर्डिंग और स्थानीय सूचनाओं के आधार पर उपद्रवियों को चिन्हित किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे उसका संबंध किसी भी प्रभावशाली व्यक्ति या गिरोह से क्यों न हो।
जिले में लगातार बढ़ रही सख्ती के बीच यह भी साफ दिखाई दे रहा है कि पुलिस प्रशासन अब अपराधियों और उनके संरक्षकों के खिलाफ आर-पार के मूड में है। वहीं आम लोगों का कहना है कि यदि पुलिस पर हमला करने वालों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो अपराधियों के हौसले और बढ़ सकते हैं।
राजेपुर की घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि जिले में अपराध के खिलाफ लड़ाई केवल पुलिस और अपराधियों के बीच नहीं, बल्कि कानून और संगठित दबंग तंत्र के बीच होती जा रही है।


