नई दिल्ली। दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 18 दिनों से जारी सोनम वांगचुक के आमरण अनशन को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चिंता बढ़ती जा रही है। इसी बीच कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सोनम वांगचुक और आंदोलन में शामिल युवाओं के नाम एक खुला पत्र लिखकर उनसे अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल समाप्त करने की भावुक अपील की है। थरूर ने कहा कि इस आंदोलन ने पूरे देश का ध्यान छात्रों और युवाओं के मुद्दों की ओर आकर्षित कर दिया है और अब इन सवालों को संसद के भीतर मजबूती से उठाया जाना चाहिए।
अपने पत्र में शशि थरूर ने कहा कि वह यह अपील किसी राजनीतिक नेता के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसे भारतीय के रूप में कर रहे हैं जो युवाओं के भविष्य को लेकर चिंतित है। उन्होंने लिखा कि एक मध्यमवर्गीय परिवार से आने के कारण वह जानते हैं कि ईमानदार परीक्षा, योग्यता के आधार पर चयन और छात्रवृत्ति ही लाखों युवाओं के सपनों को पूरा करने का सबसे बड़ा माध्यम होती है। यदि परीक्षा व्यवस्था पर भरोसा टूटता है तो इसका सबसे अधिक नुकसान गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों को उठाना पड़ता है।
थरूर ने कहा कि पेपर लीक, परीक्षाओं के रद्द होने और चयन प्रक्रिया पर उठ रहे सवालों ने युवाओं का विश्वास कमजोर किया है। उन्होंने आंदोलन कर रहे युवाओं से कहा कि उनका गुस्सा व्यवस्था के खिलाफ एक लोकतांत्रिक आवाज है और पूरा देश उनकी बात सुन रहा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि युवाओं के अधिकारों और निष्पक्ष व्यवस्था की लड़ाई संसद के भीतर भी पूरी मजबूती से लड़ी जाएगी।
सोनम वांगचुक से सीधे अपील करते हुए थरूर ने कहा कि उन्होंने अपने आंदोलन के माध्यम से देश की अंतरात्मा को झकझोर दिया है और अब उनके स्वास्थ्य की रक्षा भी उतनी ही जरूरी है। उन्होंने आग्रह किया कि आमरण अनशन समाप्त कर लोकतांत्रिक संवाद का रास्ता अपनाया जाए, क्योंकि संसद का आगामी सत्र इन मुद्दों को उठाने का सबसे उपयुक्त मंच है।
थरूर ने केंद्र सरकार से भी बातचीत शुरू करने की अपील करते हुए कहा कि लोकतंत्र में संवाद ही हर समस्या का सबसे प्रभावी समाधान होता है। उन्होंने सरकार से युवाओं की चिंताओं को गंभीरता से सुनने और सकारात्मक पहल करने का आग्रह किया।
उधर, लगातार 18 दिनों से जारी भूख हड़ताल के कारण सोनम वांगचुक की सेहत को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। विभिन्न राजनीतिक दलों के कई नेताओं ने भी उनसे अनशन समाप्त करने की अपील की है। आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य संबंधी कठिनाइयों के बावजूद वांगचुक फिलहाल अपना आंदोलन जारी रखे हुए हैं।


