औरैया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने औरैया जनपद में प्रस्तावित मकानों और दुकानों के ध्वस्तीकरण पर बड़ा हस्तक्षेप करते हुए तत्काल प्रभाव से अंतरिम रोक लगा दी है। यह महत्वपूर्ण आदेश न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी एवं न्यायमूर्ति विवेक वर्मा की खंडपीठ द्वारा सुमन देवी सहित तीन अन्य याचिकाकर्ताओं की याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए याची पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता अमरेंद्र नाथ सिंह ने मुख्य न्यायमूर्ति के समक्ष आपातकालीन सुनवाई की मांग की थी। याचिका में उल्लेख किया गया कि स्थानीय प्रशासन द्वारा गुरुवार सुबह 6 बजे से ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू करने की तैयारी की जा रही थी, जिससे प्रभावित परिवारों में भारी दहशत का माहौल बन गया था। इस स्थिति को संज्ञान में लेते हुए न्यायालय ने विशेष पीठ का गठन किया, जिसने शाम 6:40 बजे तत्काल स्थगन आदेश जारी कर दिया।
याचिकाकर्ताओं ने अपने पक्ष में दावा किया कि उनके मकान और दुकानें वर्ष 1987 से 1991 के बीच सरकार की नसबंदी प्रोत्साहन योजना के तहत आवंटित भूमि पर निर्मित हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके द्वारा प्रस्तुत किए गए वैध दस्तावेजों और साक्ष्यों पर प्रशासन ने कोई विचार नहीं किया और बिना पर्याप्त सुनवाई के जल्दबाजी में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई सुनिश्चित कर दी गई।
वहीं, राज्य सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता ने न्यायालय को बताया कि संबंधित पक्षों को कई बार नोटिस जारी किए गए, लेकिन उन्होंने समय पर साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए, जिसके चलते प्रशासन को कार्रवाई करनी पड़ी।
दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने प्रथम दृष्टया मामले को गंभीर मानते हुए यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। साथ ही राज्य सरकार को एक सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया गया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई 29 अप्रैल को की जाएगी, जिसमें मामले के तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
इस आदेश के बाद औरैया के प्रभावित क्षेत्रों में राहत की भावना देखी जा रही है, जहां लोग बुलडोजर कार्रवाई के डर से अपने घर और दुकानों को खाली करने लगे थे। फिलहाल कोर्ट के हस्तक्षेप से लोगों को अस्थायी राहत मिल गई है और अब सभी की निगाहें आगामी सुनवाई पर टिकी हैं।


