लखनऊ
प्रदेश के नोएडा में हालिया हिंसा को लेकर सियासत गरमा गई है। प्रदेश के श्रम मंत्री अनिल राजभर ने इस घटना को सुनियोजित साजिश करार देते हुए कहा कि इसका उद्देश्य राज्य की शांति व्यवस्था और विकास को बाधित करना हो सकता है। उन्होंने आशंका जताई कि हाल ही में मेरठ और नोएडा से पकड़े गए संदिग्धों के तार पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स से जुड़े होने के चलते प्रदेश में अस्थिरता फैलाने की कोशिश की जा रही है।
मंत्री ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यक्रमों को प्रभावित करने के इरादे से भी इस तरह की घटनाएं कराई जा सकती हैं। उन्होंने श्रमिकों से अपील की कि वे किसी भी भ्रामक सूचना या अफवाह के बहकावे में न आएं और शांति बनाए रखें। सरकार हर स्तर पर उनकी समस्याओं के समाधान के लिए प्रतिबद्ध है।
वहीं औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’ ने भी इस पूरे घटनाक्रम को गंभीर बताते हुए विपक्षी दलों पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस से जुड़े अराजक तत्व श्रमिक आंदोलनों की आड़ में कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने बताया कि मामले की जांच के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की एक समिति गठित की गई है।
दूसरी ओर अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर पलटवार करते हुए कहा कि नोएडा में श्रमिकों का उग्र आंदोलन सरकार की नीतियों का परिणाम है, जो पूंजीपतियों को बढ़ावा देती हैं जबकि मजदूरों की अनदेखी करती हैं। उन्होंने महंगाई और कम वेतन को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए।
घटना के बाद पूरे एनसीआर क्षेत्र में हाईअलर्ट घोषित कर दिया गया है। पुलिस और प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं। राजीव कृष्ण के अनुसार, 50 से अधिक संदिग्ध सोशल मीडिया अकाउंट चिन्हित किए गए हैं, जिनके जरिए भ्रामक और भड़काऊ सामग्री फैलाने की कोशिश की जा रही थी। इन अकाउंट्स की जांच स्पेशल टास्क फोर्स को सौंपी गई है, जो डिजिटल ट्रेल खंगाल रही है।
सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिकारियों को मौके पर भेजकर श्रमिकों से संवाद स्थापित करने की कोशिश की जा रही है, ताकि हालात सामान्य किए जा सकें। कुल मिलाकर, नोएडा की यह घटना अब कानून-व्यवस्था के साथ-साथ राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बन गई है, जिस पर सभी पक्ष अपनी-अपनी रणनीति के तहत बयानबाजी कर रहे हैं।


