फर्रुखाबाद। अक्षय तृतीया का पर्व परंपरागत रूप से सोना-चांदी खरीदने के लिए शुभ माना जाता है, लेकिन इस बार बढ़ती महंगाई ने इस शुभ अवसर की चमक फीकी कर दी। सोने और चांदी की आसमान छूती कीमतों के चलते शहर का सराफा बाजार लगभग सूना नजर आया। हालात ऐसे रहे कि लोग शगुन के लिए भी आभूषण खरीदने की हिम्मत नहीं जुटा सके, जिससे स्वर्ण व्यापारियों में गहरी चिंता और निराशा देखी गई।
नगर के प्रमुख सर्राफा व्यापारी भोलानाथ सराफ के संचालक मुदित टंडन ने बताया कि लगातार बढ़ती महंगाई ने व्यापार की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। उन्होंने कहा कि अब स्थिति यह हो गई है कि लोग जरूरत के बावजूद भी नए आभूषण खरीदने से बच रहे हैं। पहले जहां अक्षय तृतीया पर ग्राहकों की भीड़ उमड़ती थी, वहीं इस बार बाजार में सन्नाटा छाया रहा।
उन्होंने आगे कहा कि आम लोगों के लिए पुराने जेवरों से काम चलाना संभव हो जाता है, लेकिन सर्राफा व्यापार पूरी तरह नई बिक्री पर निर्भर करता है। बिक्री न होने से व्यापारियों के सामने आर्थिक संकट गहराता जा रहा है। यही वजह है कि इस बार अक्षय तृतीया का पर्व व्यापारियों के लिए उत्साह के बजाय चिंता लेकर आया है।
बताते चलें कि इस समय सोने का भाव लगभग 1,55,000 रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी का भाव 2,55,000 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया है। इन ऊंचे दामों के चलते बाजार में ग्राहकों की कमी साफ नजर आई और खरीदारी बेहद सीमित रही।
नगर के अन्य स्वर्ण व्यापारियों ने भी इसी तरह के विचार व्यक्त करते हुए कहा कि यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाले समय में सराफा व्यापार पर और अधिक संकट गहरा सकता है।
अक्षय तृतीया पर महंगाई का असर: सराफा बाजार में पसरा सन्नाटा, व्यापारियों में मायूसी


