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Tuesday, April 21, 2026

बिरला मंदिर के साये में शराब का धंधा! शिकायत के बाद जागा आबकारी विभाग- स्थानांतरण के आदेश जारी

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मथुरा/ब्रज क्षेत्र से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां आस्था और प्रशासन आमने-सामने खड़े दिखाई दिए। शहर के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल बिरला मंदिर के ठीक समीप शराब की दुकान संचालित होने का मामला तूल पकड़ गया है। यह दुकान न सिर्फ मंदिर के पास बल्कि पुलिस चौकी से सटकर चल रही थी, जिससे कानून व्यवस्था और धार्मिक मर्यादा दोनों पर सवाल खड़े हो गए।

पूरे मामले की शुरुआत तब हुई जब सनातन धर्म रक्षापीठ वृंदावन के पीठाधीश्वर और कथावाचक कौशल किशोर ठाकुर ने इस पर कड़ा विरोध दर्ज कराया। उन्होंने मुख्यमंत्री पोर्टल पर औपचारिक शिकायत करते हुए आरोप लगाया कि धार्मिक स्थल के इतने करीब शराब की बिक्री श्रद्धालुओं की आस्था पर सीधा प्रहार है।

जांच में आबकारी विभाग ने जो रिपोर्ट दी, उसने और भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए। विभाग ने अपने मानकों का हवाला देते हुए कहा कि धार्मिक स्थल से 50 मीटर की दूरी पर शराब की दुकान खोली जा सकती है। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां करती है। बिरला मंदिर के आसपास प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु और पर्यटक मौजूद रहते हैं, जिनकी आवाजाही 100 मीटर से कहीं अधिक क्षेत्र में फैली रहती है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि मंदिर के बाहर जहां छात्राएं कराटे प्रशिक्षण लेने आती हैं, वहीं पास में शराब की दुकान का संचालन सामाजिक वातावरण को दूषित कर रहा था। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि दुकान पुलिस चौकी के ठीक बगल में चल रही थी, जिससे प्रशासन की भूमिका भी कटघरे में आ गई।

विरोध केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहा। कई सामाजिक संगठनों और धार्मिक संस्थाओं ने इस मुद्दे को उठाया, लेकिन लंबे समय तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। इससे यह सवाल और गहराया कि आखिर किसके संरक्षण में यह दुकान संचालित हो रही थी?

हालांकि लगातार दबाव और शिकायत के बाद आखिरकार आबकारी विभाग को झुकना पड़ा। विभाग ने संबंधित लाइसेंसी को दुकान स्थानांतरित करने के आदेश जारी कर दिए हैं। लेकिन इस पूरे प्रकरण ने एक बड़ा सवाल छोड़ दिया है—क्या केवल 50 मीटर का नियम धार्मिक आस्थाओं की रक्षा के लिए पर्याप्त है? और क्या प्रशासनिक मानक जमीनी संवेदनशीलता से पूरी तरह कट चुके हैं?

ब्रज जैसे संवेदनशील धार्मिक क्षेत्र में इस तरह के मामलों ने शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि यह स्थानांतरण आदेश कितनी जल्दी और प्रभावी तरीके से लागू होता है, या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।

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