– डीएम की सख्त कार्रवाई—पूर्व अवर अभियंता से वसूले जाएंगे ₹1.32 लाख
– पेंशन पर चला शिकंजा
फर्रुखाबाद: जिले में प्रशासनिक ढिलाई और भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका सनसनीखेज खुलासा उस समय हुआ जब सेवानिवृत्ति के 9 महीने बाद भी एक पूर्व अवर अभियंता सरकारी आवास पर अवैध रूप से कब्जा जमाए बैठा मिला। मामला नगर मजिस्ट्रेट कार्यालय के विनियमित क्षेत्र से जुड़े पूर्व अवर अभियंता दीपेंद्र सिंह पाल उर्फ डी.के. सिंह का है, जिस पर न सिर्फ सरकारी संपत्ति पर कब्जा बनाए रखने बल्कि पद के प्रभाव का दुरुपयोग कर आम लोगों से ठगी करने के गंभीर आरोप सामने आए हैं।
रविवार को जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए उक्त सरकारी आवास को खाली करा लिया। इस दौरान मौके पर प्रशासनिक टीम की मौजूदगी में कब्जा हटवाया गया। जिलाधिकारी के निर्देश पर विभाग को ₹1,32,000 की वसूली नोटिस जारी की गई है, जिसे अब दीपेन्द्र सिंह पाल डी. के.की पेंशन से बसूला जायेगा।
चौंकाने वाली बात यह है कि 30 जून 2025 को सेवा से निवृत्त होने के बावजूद आरोपी पूर्व अवर अभियंता लगातार सरकारी आवास में रह रहा था और विभागीय कार्यों में हस्तक्षेप भी कर रहा था। सूत्रों के मुताबिक, उसने अपने पुराने रसूख का इस्तेमाल करते हुए नगर के व्यापारियों और आम नागरिकों को नोटिस के नाम पर डराया-धमकाया और अवैध वसूली की। कई व्यापारियों ने आरोप लगाया है कि उनसे लाखों रुपये की ठगी की गई, लेकिन डर और दबाव के चलते वे खुलकर सामने नहीं आ सके।
प्रशासनिक सूत्र बताते हैं कि इस पूरे मामले की शिकायतें लगातार मिल रही थीं, लेकिन लंबे समय तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिससे आरोपी के हौसले बुलंद होते गए। यही वजह रही कि रिटायरमेंट के बाद भी वह सरकारी सिस्टम में सक्रिय बना रहा और अपने प्रभाव का दुरुपयोग करता रहा।
जिलाधिकारी ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट संदेश दिया है कि सरकारी संपत्ति पर अवैध कब्जा और पद का दुरुपयोग किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। साथ ही पूरे प्रकरण की जांच के आदेश दिए गए हैं, जिसमें यह भी देखा जाएगा कि आखिर इतने लंबे समय तक प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई और किन अधिकारियों की लापरवाही इसमें शामिल रही।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या केवल आवास खाली कराना और वसूली नोटिस देना ही पर्याप्त कार्रवाई है, या फिर इस पूरे प्रकरण में आपराधिक मुकदमा दर्ज कर कठोर कानूनी कार्रवाई भी होगी? क्योंकि जिस तरह से आम जनता को निशाना बनाकर ठगी की गई है, वह सीधे तौर पर कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करता है।
जिले में यह मामला अब चर्चा का केंद्र बन गया है। लोग खुले तौर पर कह रहे हैं कि यदि समय रहते कार्रवाई होती, तो न तो सरकारी आवास पर कब्जा इतना लंबा चलता और न ही आम जनता को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि प्रशासन इस मामले को आखिर कितनी दूर तक ले जाता है और दोषियों पर क्या ठोस कार्रवाई होती है।


