नई दिल्ली। देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर हुई बढ़ोतरी ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। पहले से ही बढ़ती महंगाई, रसोई गैस, खाद्य पदार्थों और रोजमर्रा की जरूरतों की कीमतों से परेशान जनता को अब मोबाइल रिचार्ज महंगा होने की आशंका भी सताने लगी है। माना जा रहा है कि ईंधन की बढ़ती कीमतों का सीधा असर टेलीकॉम कंपनियों के परिचालन खर्च पर पड़ सकता है, जिसका बोझ अंततः ग्राहकों पर डाला जा सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार टेलीकॉम कंपनियों के नेटवर्क संचालन, टावर रखरखाव, डीजल जनरेटर, परिवहन और तकनीकी सेवाओं में ईंधन का बड़ा उपयोग होता है। पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ने से कंपनियों की लागत में इजाफा होना स्वाभाविक माना जा रहा है। ऐसे में आने वाले महीनों में मोबाइल रिचार्ज प्लान की दरों में बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है।
देश में इस समय करोड़ों लोग मोबाइल इंटरनेट और कॉलिंग सेवाओं पर निर्भर हैं। ऑनलाइन पढ़ाई, डिजिटल भुगतान, सोशल मीडिया, मनोरंजन और सरकारी सेवाओं तक पहुंच के लिए मोबाइल कनेक्टिविटी आज बुनियादी जरूरत बन चुकी है। ऐसे में रिचार्ज महंगा होने का सीधा असर मध्यम वर्ग और गरीब तबके की जेब पर पड़ सकता है।
टेलीकॉम क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि यदि ईंधन कीमतों में लगातार बढ़ोतरी जारी रहती है तो कंपनियां डेटा और कॉलिंग प्लान की कीमतों की समीक्षा कर सकती हैं। हालांकि अभी तक किसी बड़ी टेलीकॉम कंपनी की ओर से आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन बाजार में इसको लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि महंगाई का असर अब केवल रसोई या परिवहन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि डिजिटल सेवाओं पर भी इसका प्रभाव दिखाई देने लगा है। यदि मोबाइल रिचार्ज महंगे होते हैं तो डिजिटल इंडिया अभियान और ऑनलाइन सेवाओं का उपयोग करने वाले करोड़ों उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव बढ़ सकता है।


