लखनऊ
प्रदेश एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) द्वारा गिरफ्तार किए गए संदिग्ध आतंकी कृष्णा मिश्रा और दानियाल अशरफ से पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। जांच एजेंसियों को दोनों आरोपियों के मोबाइल फोन से वीडियो कॉल रिकॉर्डिंग, वॉइस नोट और चैट बरामद हुई हैं, जिनमें देश विरोधी गतिविधियों से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्य मिले हैं। अधिकारियों के अनुसार, बरामद डिजिटल सामग्री से यह संकेत मिला है कि दोनों युवक कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित होकर हिंसक गतिविधियों की योजना बना रहे थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए एटीएस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां गहराई से जांच कर रही हैं।
जांच के दौरान कृष्णा मिश्रा के मोबाइल फोन से ऐसे वीडियो भी मिले हैं जिनमें वर्दीधारियों को गोली मारने की बात कही गई थी। इतना ही नहीं, आरोपियों से गोलीबारी के वीडियो भी मांगे गए थे। पूछताछ में दोनों ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि वे किसी मौके की तलाश में थे और अवसर मिलते ही सुरक्षा बलों या पुलिसकर्मियों को निशाना बनाने की योजना बना रहे थे। एटीएस का मानना है कि दोनों संदिग्ध लंबे समय से ऑनलाइन माध्यमों के जरिए कट्टरपंथी तत्वों के संपर्क में थे और उन्हें लगातार भड़काया जा रहा था।
एटीएस ने दानियाल अशरफ के पास से 9 एमएम पिस्टल और कारतूस बरामद किए हैं, जबकि कृष्णा मिश्रा के पास से तमंचा और कारतूस मिले हैं। अब एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन हथियारों की सप्लाई किसने की और इनके पीछे कौन-सा नेटवर्क सक्रिय था। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, हथियारों की बरामदगी से यह स्पष्ट होता है कि दोनों केवल विचारधारा तक सीमित नहीं थे, बल्कि किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की तैयारी में भी थे। सुरक्षा एजेंसियां उनके संपर्कों और आर्थिक लेनदेन की भी जांच कर रही हैं।
पूछताछ में दोनों आरोपियों ने बताया कि वे सोशल मीडिया के जरिए पाकिस्तान से जुड़े लोगों के संपर्क में आए थे। एटीएस के अनुसार, संदिग्धों को कथित तौर पर आईएसआई एजेंटों द्वारा बरगलाया गया था। उन्हें कहा गया था कि अगर वे बताए गए निर्देशों का पालन करेंगे तो भारत में “हीरो” बना दिए जाएंगे और उन्हें बड़ी रकम भी दी जाएगी। जांच एजेंसियों का कहना है कि सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेलने और उन्हें हिंसक गतिविधियों के लिए उकसाने की कोशिश की जा रही है।
इस मामले ने एक बार फिर देश की सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया है। एटीएस अब दोनों आरोपियों के अन्य साथियों और संभावित स्लीपर सेल नेटवर्क की तलाश में जुटी हुई है। अधिकारियों का कहना है कि देश विरोधी गतिविधियों में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। वहीं सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग कर युवाओं को गुमराह करने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, इसलिए जागरूकता और निगरानी दोनों को मजबूत करने की आवश्यकता है।


