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Monday, June 1, 2026

शास्त्रीय कला को नया मंच, ‘ओमांजलि नृत्य अकादमी’ का शुभारंभ

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कथक नृत्य के माध्यम से बच्चों को भारतीय संस्कृति से जोड़ने का संकल्प

फर्रुखाबाद। भारतीय संस्कृति, शास्त्रीय कला और कथक नृत्य के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए ‘ओमांजलि नृत्य अकादमी’ का भव्य शुभारंभ किया गया। संस्कृति विभाग उत्तर प्रदेश की कथक नृत्यांगना अंजलि चौहान के मार्गदर्शन में शुरू हुई इस अकादमी का उद्घाटन गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम में भारतीय नृत्य अकादमी के सदस्य सुरेन्द्र पाण्डेय, उत्तर प्रदेश भारतेन्दु नाट्य अकादमी के सदस्य भूपेन्द्र प्रताप सिंह, समन्वयक अभिव्यंजना, रश्मि सिंह (कोषाध्यक्ष आकांक्षा समिति), अंशु चौहान, मीना चौहान, गोविन्द यादव सहित अनेक गणमान्य नागरिकों ने सहभागिता कर इस सांस्कृतिक पहल का स्वागत किया।
अतिथियों ने कहा कि आधुनिकता के दौर में शास्त्रीय कलाओं का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। कथक जैसी भारतीय नृत्य विधाएं न केवल बच्चों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ती हैं, बल्कि उनमें अनुशासन, आत्मविश्वास, एकाग्रता और व्यक्तित्व विकास के गुण भी विकसित करती हैं।
अकादमी की संचालिका एवं कथक नृत्यांगना अंजलि चौहान ने बताया कि बच्चों के लिए 15 दिवसीय कथक कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। कार्यशाला में विद्यार्थियों को कथक की मूलभूत तकनीकों, ताल-लय, अभिनय, मंच प्रस्तुति और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं की जानकारी दी जाएगी।
उन्होंने कहा कि कथक केवल नृत्य नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की जीवंत अभिव्यक्ति है। यह कला बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें अपनी सांस्कृतिक विरासत के प्रति जागरूक बनाती है। भविष्य में इससे बच्चों को सांस्कृतिक कार्यक्रमों, प्रतियोगिताओं और कला जगत में बेहतर अवसर प्राप्त हो सकते हैं।
कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों, अभिभावकों और उपस्थित जनों का आभार व्यक्त किया गया। साथ ही यह संकल्प लिया गया कि भारतीय शास्त्रीय कलाओं और सांस्कृतिक मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का यह अभियान निरंतर जारी रहेगा।
मोबाइल और डिजिटल युग में जब नई पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से दूर होती जा रही है, ऐसे समय में ओमांजलि नृत्य अकादमी जैसी पहलें भारतीय संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम बन सकती हैं। फर्रुखाबाद में शुरू हुई यह अकादमी आने वाले समय में कथक और शास्त्रीय कला के क्षेत्र में नई प्रतिभाओं को मंच प्रदान कर सकती है।
“नृत्यं संस्कृतिः, नृत्यं साधना, नृत्यं जीवनम्” इसी भावना के साथ अकादमी ने अपनी सांस्कृतिक यात्रा का शुभारंभ किया।

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