(मनोज कुमार अग्रवाल-विनायक फीचर्स)
आजकल अधिकांश एकल परिवार हैं उनमे भी न्यूक्लियर यानि एक या दो बच्चे इस स्थिति में कुछ पिता अपने बच्चों से अधिक अपेक्षा बना लेते हैं और उन का कैरियर संवारने के लिए बचपन से ही इस तरह की सख्ती करते हैं जो बच्चों को भीतर तक मर्माहत कर देती है उनका बचपन छीन लेती है नतीजा यह निकलता है कि कई बार बच्चे अभिभावकों के दबाव के चलते मानसिक बीमारी से ग्रसित हो जाते हैं उनका स्वाभाविक विकास रुक जाता है और कई बार वह बागी होकर एंग्री यंगमेन बन जाते हैं और कुछ अधिक संवेदनशील बच्चे इस कदर टूट जाते हैं कि वह आत्मघाती कदम उठा कर अपनी जीवन लीला ही समाप्त कर देते हैं जैसे कि कानपुर के एक युवा वकील ने किया जब पिता के कर्कश अपमान जनक व्यवहार के साथ जद्दोजहद में युवा वकील इतना अधिक टूट गया कि उसने भरी कचहरी में पांचवी मंजिल से छलांग लगा कर जीवन को अलविदा कह दिया।
उत्तर प्रदेश के कानपुर में कानपुर कचहरी में अधिवक्ता प्रियांशु श्रीवास्तव ने पांचवीं मंजिल से छलांग लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। प्रियांशु ने यह आत्मघाती कदम अपने पिता राजेंद्र कुमार श्रीवास्तव की कथित सख्ती और मानसिक प्रताड़ना से तंग आकर उठाया। मृतक ने आत्महत्या से ठीक पहले व्हाट्सएप पर दो पन्नों का स्टेटस नोट साझा किया था। इस नोट में उन्होंने बचपन की कड़वी यादों और वर्तमान की बंदिशों का विस्तार से जिक्र किया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और व्हाट्सएप स्टेटस को जांच का मुख्य आधार बनाया है।
युवा वकील प्रियांशु श्रीवास्तव के आत्महत्या मामले ने देश भर में सनसनी मचा दी है। कानपुर कोर्ट की पांचवी मंजिल से छलांग लगाने वाले युवा वकील का सुसाइड नोट इस समय चर्चा का विषय बना हुआ है। दरअसल, गुरुवार को दोपहर बाद युवा वकील ने कोर्ट भवन की पांचवी मंदिर से छलांग लगा दी थी। मौके पर ही उसकी मौत हो गई। इससे पहले उसने सोशल मीडिया एकाउंट पर स्टेटस पर दो पेज का सुसाइड नोट अपलोड किया। इसमें उसने अपने पिता राजेंद्र कुमार श्रीवास्तव के जुल्म की इंतेहा को दर्ज किया।
प्रियांशु श्रीवास्तव कानपुर के बर्रा आठ वरुण विहार का रहने वाला था। उसके पिता राजेंद्र कुमार श्रीवास्तव भी कानपुर कोर्ट में वकील थे। 23 वर्षीय प्रियांशु ने वर्ष 2025 में डीसी लॉ कॉलेज से कानून की डिग्री हासिल की। इसके बाद वह अपने पिता के साथ ही कानपुर कोर्ट में वकालत करने लगा। गुरुवार दोपहर 12:05 बजे उसने सुसाइड नोट लिखा। इसके तीन घंटे बाद कोर्ट भवन की पांचवी मंजिल से छलांग लगा दी। जिस कानपुर कोर्ट भवन में यह घटना घटी,वहां कोर्ट भवन के पीछे की ओर खिड़कियां बनी हुई हैं। उनके चारों तरफ जाली लगाई है। यहां एक सिरे पर जाली नहीं है। प्रियांशु वहीं जाकर ऊपर बैठ गया था। करीब 10 मिनट तक वहीं बैठा रहा। इसके बाद वह पीछे की तरफ कूद गया। उसके नीचे गिरते ही तेज आवाज ने हर किसी को चौंका दिया। पांचवी मंजिल पर मौजूद वकील और अन्य लोग हैरान रह गए। कोर्ट भवन में तेज धमाके के साथ आवाज हुई तो वकील नीचे की ओर भागे। प्रियांशु जहां गिरा वहां कोई आता-जाता नहीं है। उधर जाने का रास्ता भी बंद रहता है। बार एंड लॉयर्स के पदाधिकारी मौके पर पहुंचे। चैनल को खुलवाया गया। इसके बाद सभी मौके पर पहुंचे। कुछ देर बाद वहां जिला जज अनमोल पाल भी न्यायिक अधिकारियों के साथ पहुंच गए। पुलिस और फोरेंसिक टीम भी घटना की जानकारी मिलते ही मौके पर पहुंची। घटनास्थल से सबूत जुटाए गए। शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया गया। पुलिस का कहना है कि सुसाइड नोट में युवा वकील ने पिता पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
युवा वकील ने सुसाइड नोट में लिखा है कि उसके ऊपर 5-6 साल की उम्र से ही जुल्म किया जा रहा है। मैंगो जूस वाली कहानी भी साझा की। वकील ने लिखा कि बात-बात पर पिता मेरी पिटाई करते थे। हमेशा मेरी बुराई ही होती थी। हमेशा नीचा दिखाया जाता है। इसलिए अब इस जिंदगी को खत्म कर रहा हूं। पिता के खिलाफ आक्रोश जताने वाले युवा वकील ने लिखा, ‘लव यू मम्मी…’।
युवा वकील प्रियांशु ने अपने सुसाइड नोट में 6 साल की उम्र में हुए अत्याचार की कहानी भी साझा की है। इसमें उसने लिखा कि मुझे यह बताने में काफी शर्म महसूस हो रही है। उसने लिखा कि 6 साल के उम्र में फ्रिज में रखे आम के जूस को पीने के चलते मेरे पिता ने मुझे निर्वस्त्र कर घर के बाहर भगा दिया था। हमारे प्रति उनका ऐसा रवैया हमेशा बना रहा। वह हमेशा मुझे बेइज्जत करते रहते थे। वकील ने सुसाइड नोट में लिखा है कि मैं मानता हूं कि हर माता-पिता को शुरू से ही सख्त रवैया अपनाया जाना चाहिए। इससे बच्चों का भविष्य संवर सकता है लेकिन अगर आप अपने बच्चों पर इतनी ज्यादा सख्ती करेंगे तो बच्चों को हर पल घुटन महसूस होने लगेगी। परीक्षा के एक दिन पहले अगर सिलेबस पूरा तैयार नहीं है तो पीटने लगते थे। हर समय, हर मिनट नजर रखते थे। एक-एक मिनट का हिसाब लेते थे। यह मानसिक प्रताड़ना ही है। इस प्रकार के टॉर्चर से मैं अब अधिक समय तक नहीं जी सकता हूं। इसलिए, मैंने यह कदम उठाने का निर्णय लिया।
प्रियांशु ने सुसाइड नोट में दावा किया कि बचपन में मारपीट और घर से भगाए जाने की घटना के बाद भी पिता नहीं थमे। बड़ा होने पर भी पिता उसके साथ अलग व्यवहार करते रहे। लगातार उसे मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी। पिता बार-बार उसे बेइज्जत करते थे। पीटने लगते थे। इसने प्रियांशु को अंदर तक तोड़ दिया। वह मानसिक तौर पर टूट गया था। उसने अपने सुसाइड नोट में लिखा भी कि मेरा यह निवेदन है कि मेरी लाश को मेरे पापा छू भी न पाएं। भगवान करे ऐसा पिता किसी को भी न मिले। इससे पिता के प्रति उसके मन की भावनाओं को समझा जा सकता है।
यह दुखद घटना उन अभिभावकों की आंखे खोलने के लिए सबक है जो अपने सपनों को जबरन अपने बच्चों पर थोपते है और जरा जरा सी बात पर दूसरे लोगों के सामने उन्हें अपमानित लहजे से प्रताड़ित करते हैं। आज इक्कीसवीं सदी का दौर है इसमे उन्नीसवीं बीसवीं सदी का अशिक्षित मानसिक शारीरिक प्रताड़ना देने वाला दौर नही चल सकता। आज के किशोर युवा बहुत संवेदनशील है वह थोड़े से दुर्व्यवहार पर ही बिखर सकते हैं,टूट सकते हैं। इस लिए बालकों,किशोरों और नवयुवाओं के साथ सभ्यता से मित्रवत मार्गदर्शन करना चाहिए न कि यातना भरा दुर्व्यवहार। आज प्रियांशु का पिता वह अभागा पिता है जिसने खुद अपने गलत व्यवहार के चलते अपने भविष्य को मौत के मुंह में जाने के लिए मजबूर कर दिया। बेशक उनकी सोच बेटे को बेहतर कैरियर देने और समाज में सफल इंसान बनाने की रही होगी लेकिन यकीनन उनका तरीका अक्षम्य और अमानवीयता भरा बर्बर रहा जिसका दर्द लेकर एक होनहार युवा ने मौत को गले लगा लिया और पिता की बुढ़ापे की लाठी खत्म हो गई। (विनायक फीचर्स)


