लखीमपुर खीरी। भीरा थाना क्षेत्र के सेमरिया गांव में 25 गिद्धों की सामूहिक मौत ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। यह घटना न केवल वन्यजीव संरक्षण बल्कि पर्यावरणीय संतुलन के लिए भी बड़ा खतरा मानी जा रही है।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गिद्धों ने कथित रूप से कुत्तों के शव खाए थे, जिनमें किसी जहरीले पदार्थ की मौजूदगी की आशंका जताई जा रही है। शव खाने के कुछ ही समय बाद बड़ी संख्या में गिद्धों की मौत हो गई। घटनास्थल पर मृत गिद्धों के पड़े होने से ग्रामीणों में दहशत और चिंता का माहौल है।
घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों की टीम मौके पर पहुंच गई और जांच शुरू कर दी गई है। मृत गिद्धों के नमूने पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे जा रहे हैं, ताकि मौत के असली कारणों का पता लगाया जा सके।
इस गंभीर मामले को प्रदेश सरकार के मंत्री अरुण सक्सेना ने संज्ञान में लिया है। जानकारी के अनुसार, मंत्री स्वयं आज घटनास्थल पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लेंगे और अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट मांगेंगे। साथ ही, मामले में लापरवाही या साजिश की संभावना को देखते हुए कड़ी कार्रवाई के निर्देश भी दिए जा सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, गिद्ध पारिस्थितिकी तंत्र के “प्राकृतिक सफाईकर्मी” होते हैं, जो मृत पशुओं को खाकर वातावरण को स्वच्छ बनाए रखते हैं। लेकिन जहरीले पदार्थों के संपर्क में आने से इनकी संख्या लगातार घट रही है। एक साथ 25 गिद्धों की मौत होना इस बात का संकेत है कि क्षेत्र में वन्यजीवों के लिए गंभीर खतरा मौजूद है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि यह घटना जहर डालकर जानवरों को मारने की साजिश से जुड़ी है, तो यह बेहद चिंताजनक है और इसके पीछे जिम्मेदार लोगों की पहचान कर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
लखीमपुर की यह घटना केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि पर्यावरणीय लापरवाही और संभावित आपराधिक कृत्य का संकेत भी हो सकती है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो गिद्धों जैसी महत्वपूर्ण प्रजातियां पूरी तरह विलुप्ति की कगार पर पहुंच सकती हैं। प्रशासन को चाहिए कि इस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों को चिन्हित करे और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाए।
25 गिद्धों की दर्दनाक मौत: जहरीले शव खाने की आशंका, मंत्री अरुण सक्सेना करेंगे मौके का निरीक्षण


