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Wednesday, April 8, 2026

राज्यपाल से संवाद में छलका दर्द: आलू किसानों की दुर्दशा पर नम हुई आंखें

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– अशोक कटियार के नेतृत्व में गवर्नर से मिला प्रतिनिधि मण्डल

लखनऊ । आलू किसानों की बदहाल स्थिति को लेकर एक मार्मिक तस्वीर सामने आई, जब आलू विकास एवं विपणन सहकारी संघ की ओर से अशोक कटियार ने गवर्नर आनंदी वेन पटेल से मुलाक़ात कर आलू किसानों का दर्द साझा किया और प्रमुख मांगों का ज्ञापन उन्हें राजभवन में दिया ।

संबोधित ज्ञापन सौंपते हुए किसानों की पीड़ा बयां की। संवाद के दौरान हालात इतने भावुक हो गए कि किसानों की बदहाली का जिक्र करते-करते आंखें नम हो गईं।

ज्ञापन में बताया गया कि उत्तर प्रदेश के करीब 2207 शीतगृहों में लगभग 195 लाख मीट्रिक टन आलू भंडारित है, लेकिन बाजार में आलू की कीमतें इतनी गिर चुकी हैं कि किसानों की लागत तक नहीं निकल पा रही। इससे किसान आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहे हैं।

ज्ञापन में राज्यपाल से किसानों के हित में ठोस कदम उठाने की मांग की गई। प्रमुख मांगों में आलू विकास बोर्ड की स्थापना, न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित करना, शीतगृहों में भंडारण शुल्क पर अनुदान, तथा सरकारी राशन दुकानों के माध्यम से आलू वितरण शामिल हैं।

इसके अलावा आलू आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने, निर्यात को सरल बनाने, और कोल्ड स्टोरेज को सस्ती बिजली उपलब्ध कराने जैसी मांगें भी रखी गईं।

प्रतिनिधि ने भावुक शब्दों में कहा—
“परमात्मा आलू किसानों को कभी तो न्याय देगा… संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक अन्नदाता को उसका हक नहीं मिल जाता।” यह पूरा मामला एक बार फिर प्रदेश में कृषि नीति और बाजार व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। जब उत्पादन अधिक होता है तो कीमतें गिर जाती हैं, और जब कमी होती है तो उपभोक्ता महंगाई से जूझता है—ऐसे में सबसे ज्यादा नुकसान किसान को ही उठाना पड़ता है।

फर्रुखाबाद जैसे आलू उत्पादन केंद्र में यह स्थिति और भी चिंताजनक है, जहां हजारों किसान सिर्फ आलू पर निर्भर हैं।
आलू किसानों की यह पीड़ा सिर्फ एक जिले की नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश की तस्वीर है। अब देखना यह होगा कि शासन-प्रशासन इस भावनात्मक अपील को कितनी गंभीरता से लेता है।

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