फर्रुखाबाद
इस समय आलू उत्पादक किसान गहरे संकट से गुजर रहे हैं। एक ओर जहां किसानों ने भारी लागत लगाकर आलू की खेती की, वहीं दूसरी ओर बाजार में गिरते दामों ने उनकी कमर तोड़ दी है। हालात यह हैं कि किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है।
फर्रुखाबाद जिले के विभिन्न गांवों के किसान बताते हैं कि इस बार आलू की पैदावार तो अच्छी हुई, लेकिन मंडियों में कीमतें इतनी गिर गई हैं कि लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है। बीज, खाद, सिंचाई और मजदूरी पर हजारों रुपये खर्च करने के बावजूद किसान अपनी फसल को औने-पौने दामों में बेचने को मजबूर हैं। कई किसानों ने तो आलू को कोल्ड स्टोरेज में रखने का सहारा लिया, लेकिन वहां भी भंडारण शुल्क और बढ़ते खर्च ने उनकी परेशानी को और बढ़ा दिया है।
किसानों का कहना है कि बाजार में बिचौलियों का दबदबा है, जिसके चलते उन्हें उनकी मेहनत का सही मूल्य नहीं मिल पाता। वहीं सरकारी स्तर पर समर्थन मूल्य या खरीद व्यवस्था की कमी भी किसानों की मुश्किलें बढ़ा रही है। कई किसान अब कर्ज के बोझ तले दबते जा रहे हैं और भविष्य की खेती को लेकर चिंतित हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों के बीच मायूसी का माहौल है। उनका कहना है कि यदि जल्द ही सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो उन्हें भारी नुकसान झेलना पड़ेगा और आलू की खेती से उनका भरोसा उठ सकता है। किसानों ने सरकार से मांग की है कि आलू का उचित मूल्य सुनिश्चित किया जाए और उन्हें आर्थिक सहायता प्रदान की जाए, ताकि वे इस संकट से उबर सकें।


