7 देशों के 250 से अधिक प्रतिभागियों ने किया मंथन
फर्रुखाबाद। भारतीय महाविद्यालय में आयोजित द्विदिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का सफल समापन विविध शैक्षणिक विमर्श और शोध प्रस्तुतियों के साथ हुआ। इस संगोष्ठी में इंडोनेशिया, फिजी, श्रीलंका, बांग्लादेश सहित सात से अधिक देशों तथा भारत के विभिन्न राज्यों से आए 250 से अधिक अध्येताओं और शोध छात्रों ने सक्रिय सहभागिता करते हुए अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए। कार्यक्रम के अंतर्गत कुल 14 तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें शिक्षा, शोध और समसामयिक विषयों पर गहन चर्चा हुई।
संगोष्ठी के विभिन्न तकनीकी सत्रों की अध्यक्षता देश-विदेश के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों एवं विद्वानों ने की, जिनमें प्रो. अनिल कुमार विश्वकर्मा, डॉ. मेवालाल, डॉ. राजीव कुमार सिंह, डॉ. राजू सिंह, डॉ. रश्मि दुबे, डॉ. ज्योति हर्मित, डॉ. राहुल द्विवेदी, डॉ. संदीप सिंह वर्मन, डॉ. उमेश सिंह, डॉ. लेखराम दन्नाना, डॉ. संजीवनी आर्या, डॉ. मनोज कुमार, डॉ. अमित कुमार, डॉ. प्रियांशु गुप्ता, डॉ. विनीत सिंह, प्रो. स्वाति सक्सेना, डॉ. अश्विनी देवी तथा डॉ. जितेंद्र डबराल प्रमुख रूप से शामिल रहे। वहीं तकनीकी सत्रों का संचालन डॉ. संदीप कुमार द्विवेदी, डॉ. रमाशंकर, श्री नीरज कुमार द्विवेदी, सुश्री प्राची गोस्वामी, श्री समीर कुमार गुप्ता, डॉ. निधीश कुमार सिंह, डॉ. आलोक बिहारी लाल, डॉ. धनंजय कुमार कुशवाहा, डॉ. मधुप कुमार, श्री विजय कुमार एवं श्री विवेक सिंह द्वारा कुशलतापूर्वक किया गया।
संगोष्ठी के समापन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में श्री सुधीर चंद्र शर्मा उपस्थित रहे, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. योगेंद्र पांडेय ने सहभागिता की। मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. निशंका संजीवनी (श्रीलंका) तथा विशिष्ट वक्ता के रूप में प्रो. अजय कुमार चौबे ने अपने विचार प्रस्तुत किए। समापन सत्र की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. रमन प्रकाश ने की, जिन्होंने संगोष्ठी के महत्व और इसके शैक्षणिक योगदान पर प्रकाश डाला।
संगोष्ठी समन्वयक डॉ. निधीश कुमार सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन में 250 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिसमें सात से अधिक देशों की सहभागिता ने इसे विशेष रूप से समृद्ध बनाया। समापन सत्र का संचालन संगोष्ठी सचिव डॉ. संदीप कुमार द्विवेदी एवं सुश्री प्राची गोस्वामी द्वारा किया गया।
इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि इस प्रकार की अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियां न केवल शोध और ज्ञान के आदान-प्रदान का सशक्त मंच प्रदान करती हैं, बल्कि वैश्विक स्तर पर शैक्षणिक सहयोग को भी नई दिशा देती हैं। कार्यक्रम के सफल आयोजन पर आयोजकों एवं प्रतिभागियों ने संतोष व्यक्त करते हुए भविष्य में भी ऐसे आयोजनों की आवश्यकता पर बल दिया।


