फर्रुखाबाद। समाज कल्याण विभाग में भ्रष्टाचार और अवैध वसूली का बड़ा खेल चलने के आरोप सामने आ रहे हैं। शासन द्वारा गरीबों और जरूरतमंदों को राहत देने के लिए चलाई जा रही योजनाओं पर कुछ कर्मचारियों द्वारा कमाई का जरिया बना लेने की चर्चा तेज हो गई है। विभाग में व्याप्त इस कथित गोलमाल को लेकर क्षेत्र में भारी नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि जिन योजनाओं का उद्देश्य गरीब और असहाय परिवारों की मदद करना है, उन्हीं योजनाओं के नाम पर उनसे मोटी रकम वसूली जा रही है।
सूत्रों के अनुसार समाज कल्याण विभाग कार्यालय में तैनात संतोष और गीता पर पारिवारिक लाभ योजना और शादी अनुदान योजना के फॉर्म पास कराने के नाम पर प्रति फॉर्म करीब 5000 रुपये तक की वसूली करने के गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। आरोप है कि बिना नजराना दिए फाइल आगे बढ़ाना मुश्किल बना दिया गया है। इस कथित वसूली से गरीब परिवार, जो किसी तरह सरकारी योजनाओं का सहारा लेकर अपनी परेशानियां कम करना चाहते हैं, वे सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं।
बताया जा रहा है कि इस पूरे मामले में एक कथित दलाल भी सक्रिय है। जानकारी के मुताबिक विकासखंड कमालगंज क्षेत्र के गांव फतेहउल्लापुर निवासी सुरेश कठेरिया क्षेत्र में घूम घूमकर लोगों से पारिवारिक लाभ और शादी अनुदान के फॉर्म एकत्रित करता है। आरोप है कि वह लाभ दिलाने का भरोसा देकर लोगों से पैसे वसूलता है और फिर यह रकम संबंधित कार्यालय तक पहुंचाई जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि कई जरूरतमंद परिवार मजबूरी में पैसे देकर फॉर्म जमा कराते हैं, क्योंकि उन्हें डर रहता है कि यदि पैसा नहीं दिया तो उनका आवेदन लंबित पड़ा रहेगा।
विभाग से जुड़े कुछ कर्मचारियों ने नाम न छापने की शर्त पर दावा किया कि इस कथित वसूली में ऊपर तक हिस्सेदारी पहुंचने की भी चर्चा है। सूत्रों का कहना है कि प्रति फॉर्म वसूली गई रकम में से लगभग 2000 रुपये तक की राशि समाज कल्याण अधिकारी रेनू तक पहुंचने की बात कही जा रही है। कर्मचारियों का दावा है कि बिना उच्च स्तर की जानकारी या सहमति के इतनी खुली वसूली संभव नहीं है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन विभाग के भीतर इस तरह की चर्चाएं आम हो चुकी हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि शासन द्वारा भ्रष्टाचार पर सख्ती के लगातार दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट दिखाई दे रही है। लोगों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति द्वारा शिकायत भी की जाती है तो उस पर कार्रवाई होने की उम्मीद बेहद कम होती है, क्योंकि कथित तौर पर ऊपर तक सेटिंग होने की बात कही जाती है। इसी वजह से कई लोग खुलकर शिकायत करने से भी डरते हैं।
ग्रामीणों और लाभार्थियों का कहना है कि अगर इन आरोपों में सच्चाई है तो यह बेहद गंभीर मामला है, क्योंकि इससे सरकार की कल्याणकारी योजनाओं की साख पर सवाल उठते हैं। गरीब और जरूरतमंद परिवार, जिनके लिए ये योजनाएं शुरू की गई हैं, वही लोग यदि अवैध वसूली का शिकार बनेंगे तो योजनाओं का उद्देश्य ही खत्म हो जाएगा।
जनपद के जागरूक नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में कोई भी सरकारी योजनाओं के नाम पर गरीबों का शोषण करने की हिम्मत न कर सके।
हालांकि इस पूरे मामले को लेकर अभी तक विभागीय अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इन गंभीर आरोपों को किस तरह लेता है और क्या वास्तव में मामले की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाती है या फिर यह मामला भी अन्य शिकायतों की तरह फाइलों में दबकर रह जाता है।
समाज कल्याण विभाग में भ्रष्टाचार का बड़ा खेल! योजनाओं के नाम पर गरीबों से वसूली


