मुंबई। भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को भी गिरावट का सिलसिला जारी रहा। लगातार सातवें सप्ताह लाल निशान में बंद हुए बाजार में नए कारोबारी सप्ताह की शुरुआत भी भारी बिकवाली के साथ हुई। सेंसेक्स करीब 1000 अंक यानी 1.30 प्रतिशत टूटकर 72,900 के नीचे कारोबार करता दिखा, जबकि निफ्टी करीब 300 अंक यानी 1.30 प्रतिशत गिरकर 22,850 के आसपास पहुंच गया। बैंकिंग और एफएमसीजी कंपनियों के शेयरों में विशेष दबाव देखा गया।
बाजार में गिरावट के पीछे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बने तनाव को प्रमुख वजह माना जा रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने को लेकर फिलहाल स्पष्ट संकेत नहीं हैं। इसके साथ ही रूस-यूक्रेन के बीच बढ़ते तनाव ने भी वैश्विक बाजारों की चिंता बढ़ाई है। इन परिस्थितियों के चलते निवेशकों में सतर्कता बढ़ी और भारतीय बाजार में बिकवाली का दबाव देखने को मिला।
कच्चे तेल की कीमत 107 डॉलर के करीब
कच्चे तेल की बढ़ती कीमत भी भारतीय बाजार के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। ब्रेंट क्रूड करीब 107 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है। अमेरिका-ईरान तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति को लेकर बनी चिंताओं के कारण कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। महंगा कच्चा तेल भारत के आयात बिल, महंगाई और रुपये की स्थिति पर दबाव डाल सकता है। इसका असर बाजार की धारणा पर भी पड़ रहा है।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी से दबाव
अमेरिका में 10 साल की ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड बढ़कर 5.11 प्रतिशत तक पहुंच गई है। यह 2007 के बाद का उच्च स्तर बताया जा रहा है। अमेरिकी बॉन्ड पर रिटर्न बढ़ने से वैश्विक निवेशकों के लिए डॉलर आधारित निवेश अधिक आकर्षक हो सकता है। इसका असर भारत जैसे उभरते बाजारों में विदेशी निवेश के प्रवाह पर पड़ सकता है।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी बाजार पर दबाव बढ़ा रही है। पिछले सात कारोबारी दिनों में विदेशी निवेशकों ने करीब 10,914 करोड़ रुपये के शेयर बेचे हैं। वहीं घरेलू संस्थागत निवेशकों ने इसी अवधि में करीब 13,601 करोड़ रुपये की खरीदारी की है। इसके बावजूद विदेशी पूंजी की निकासी और वैश्विक संकेतों का असर बाजार पर दिखाई दे रहा है।
दो आईपीओ भी खुले
सोमवार से दो नए आईपीओ निवेश के लिए खुले हैं। एसआरआईटी इंडिया आईपीओ के जरिए करीब 218 करोड़ रुपये जुटाने की योजना है, जबकि शाह इन्वेस्टर्स होम का आईपीओ करीब 90.17 करोड़ रुपये का है। दोनों आईपीओ में 30 सितंबर तक बोली लगाई जा सकेगी।
एशियाई बाजारों में भी मिलाजुला रुख रहा। दक्षिण कोरिया का कोस्पी करीब 2.48 प्रतिशत गिरा, जबकि जापान का निक्केई लगभग 0.05 प्रतिशत नीचे रहा। दूसरी ओर हांगकांग का हैंगसेंग करीब 0.70 प्रतिशत बढ़त में कारोबार करता दिखा। इससे पहले 25 सितंबर को अमेरिकी बाजार बढ़त के साथ बंद हुए थे, लेकिन वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों ने सोमवार को भारतीय बाजार की धारणा पर दबाव बनाया।


