कमालगंज, फर्रुखाबाद । केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी स्वच्छ भारत मिशन योजना के तहत कमालगंज क्षेत्र पंचायत की विभिन्न ग्राम सभाओं में लाखों रुपये की लागत से बनाए गए सार्वजनिक शौचालयों की बदहाली अब व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि कागजों में शौचालय संचालित हैं, जबकि हकीकत में कई शौचालयों पर ताले लटके हैं। देखरेख के लिए तैनात केयरटेकर भी नियमित रूप से नहीं पहुंच रहे।
खेरे नगला गांव में सामुदायिक शौचालय कई दिनों से बंद पड़ा होने की शिकायत सामने आई है। ग्रामीण अंशुल, विमल, सुमित, रोविन, मंजेश, रामप्यासी, रूबी, बबली और रामा देवी का कहना है कि शौचालय नियमित रूप से नहीं खुलता। इससे महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों के मुताबिक शौचालय पर तैनात कर्मचारी से इसे खोलने के लिए कहा गया तो उसने मानदेय न मिलने की बात कही। ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान अनीषा बेगम से भी शिकायत की। आरोप है कि वहां से भी उन्हें संतोषजनक समाधान नहीं मिला और शौचालय न खुलने की बात कही गई।
इसके बाद ग्रामीणों ने पंचायत सचिव कुलदीप यादव से शिकायत की। सचिव ने जल्द शौचालय खुलवाने का भरोसा दिया है।
ग्रामीणों का कहना है कि खेरे नगला की स्थिति अकेली नहीं है। कमालगंज ब्लॉक की कई ग्राम पंचायतों में सार्वजनिक शौचालयों के संचालन और रखरखाव को लेकर शिकायतें हैं। कहीं पुरुष और महिला शौचालयों के गेट पर ताले लटके हैं तो कहीं पानी, बिजली, टोंटी और अन्य सुविधाएं खराब पड़ी हैं। कई स्थानों पर साफ-सफाई के अभाव में गंदगी की समस्या भी बनी हुई है।
ग्रामीणों के अनुसार केयरटेकरों के मानदेय का भुगतान नहीं होने की स्थिति में भी नियमित संचालन प्रभावित हो रहा है। इससे उन लोगों के सामने परेशानी खड़ी हो रही है जिनके घरों में निजी शौचालय नहीं हैं।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि गांव-गांव बने सार्वजनिक शौचालयों का स्थलीय निरीक्षण कराया जाए। बंद पड़े शौचालयों को नियमित रूप से खुलवाने के साथ केयरटेकरों के मानदेय की समस्या दूर की जाए। साथ ही निर्माण से लेकर संचालन और रखरखाव तक की व्यवस्था की जांच कर जिम्मेदारी तय की जाए, ताकि सरकारी धन से बनी सुविधाओं का वास्तविक लाभ ग्रामीणों को मिल सके और स्वच्छ भारत मिशन का उद्देश्य पूरा हो सके।


