– मायावती के करीबी रहे सिद्धार्थ का बड़ा फैसला, बोले- ‘बहनजी का आदेश दुनिया में सबसे बड़ा’
लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी में चल रहे अंदरूनी घमासान के बीच पार्टी की राजनीति से जुड़ा एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। मायावती के करीबी रहे अशोक सिद्धार्थ ने राजनीति और सामाजिक जीवन से संन्यास लेने का ऐलान किया है। उनके इस फैसले को बसपा में आकाश आनंद की वापसी का रास्ता साफ करने वाली सियासी कुर्बानी के तौर पर देखा जा रहा है।
अशोक सिद्धार्थ रिश्ते में आकाश आनंद के ससुर हैं। उन्होंने मायावती को संबोधित करते हुए कहा कि उनके लिए ‘बहनजी’ का आदेश दुनिया में सबसे बड़ा है। सिद्धार्थ ने दावा किया कि उन्होंने करीब 35 वर्षों तक बसपा और कांशीराम के मिशन के लिए काम किया और कभी पार्टी हित के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाया।
राजनीति से संन्यास की घोषणा के साथ अशोक सिद्धार्थ ने अपने ऊपर लगाए जा रहे आरोपों पर भी सफाई दी। उन्होंने कहा कि उन पर आकाश आनंद को गुमराह करने और बसपा पर कब्जा करने की कोशिश करने जैसे आरोप लगाए जा रहे हैं, लेकिन इनमें कोई सच्चाई नहीं है।
सिद्धार्थ ने इन आरोपों को विरोधियों की साजिश बताते हुए कहा कि बसपा के भीतर कुछ लोग पार्टी और बहुजन मिशन को नुकसान पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं।
अशोक सिद्धार्थ के बयान का सबसे चौंकाने वाला पहलू उनका यह खुलासा है कि कई महीनों तक उनकी अपने दामाद आकाश आनंद से मुलाकात तक नहीं हो पाती थी। इसके बावजूद उनके राजनीतिक संन्यास को आकाश आनंद की वापसी से जोड़कर देखे जाने पर उन्होंने आपत्ति जताई है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके संन्यास को आकाश आनंद की वापसी से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।
अशोक सिद्धार्थ का यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब बसपा की अंदरूनी राजनीति में आकाश आनंद की भूमिका को लेकर लगातार चर्चाएं चल रही हैं।


