समैचीपुर चितार में कटान तेज होने से ग्रामीणों में दहशत, आठ परिवारों ने घर खाली कर सामान सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया; डेढ़ से दो फीट पानी में जान जोखिम में डालकर गुजर रहे दोपहिया वाहन चालक
शमसाबाद। थाना क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित गांव समैचीपुर चितार में गंगा का कटान लगातार तेज होता जा रहा है। कटान की चपेट में आकर अब तक चार पक्के मकान गंगा में समा चुके हैं। इसके अलावा दो झोपड़ियां भी नदी के तेज कटान की भेंट चढ़ गईं। लगातार बढ़ते खतरे के बीच ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। कई परिवार अपने आशियाने खाली कर जरूरी सामान सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में जुट गए हैं।
गांव में शुक्रवार को दिलदार का पक्का मकान भरभराकर गंगा में गिर गया। इसके अलावा जुमन मियां, इमरान और इबली के मकान भी कटान की चपेट में आकर नदी में समा गए। वहीं नौशाद और मेशाद की झोपड़ियां भी गंगा के तेज कटान के कारण बह गईं। एक के बाद एक मकानों के नदी में समाने से ग्रामीणों को अपने घरों की सुरक्षा की चिंता सताने लगी है।
ग्रामीणों का कहना है कि गंगा का कटान तेजी से बढ़ रहा है। नदी लगातार आबादी की ओर बढ़ रही है। ऐसे में आसपास के अन्य मकानों पर भी खतरा मंडरा रहा है। ग्रामीणों को आशंका है कि यदि कटान की यही स्थिति बनी रही तो आने वाले समय में कई और मकान इसकी चपेट में आ सकते हैं।
खतरे को देखते हुए शनिवार को गांव के आठ ग्रामीणों ने अपने घर खाली कर दिए। उन्होंने घरों से जरूरी सामान निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना शुरू कर दिया। इनमें शाहनवाज, मैसाद, आसिफ, ईदुल, नस्तर अली, कमालुद्दीन, रशुद्दीन और इरशाद शामिल हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जब नदी घरों के करीब पहुंच रही है तो जान-माल की सुरक्षा के लिए घर खाली करना ही बेहतर है।
उधर, गंगा का जलस्तर बढ़ने से शनिवार को चौरा गांव के सामने शमसाबाद-शाहजहांपुर मार्ग पर फिर बाढ़ का पानी बहने लगा। मार्ग पर करीब डेढ़ से दो फीट तक पानी बह रहा है। इसके बावजूद दोपहिया वाहन चालक जोखिम उठाकर पानी के बीच से निकल रहे हैं। तेज बहाव और सड़क पर पानी की अधिक गहराई के कारण यहां किसी भी समय हादसा होने की आशंका बनी हुई है।
मार्ग पर पानी आने से आवागमन प्रभावित हुआ है। ग्रामीणों के लिए यह रास्ता महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है, ऐसे में पानी बढ़ने पर परेशानी और बढ़ सकती है। ग्रामीणों का कहना है कि जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और यदि पानी की स्थिति इसी तरह बनी रही तो मार्ग पर आवागमन पूरी तरह प्रभावित हो सकता है।
समैचीपुर चितार में मकानों के गंगा में समाने के बाद ग्रामीण अब प्रशासन से सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कटान तेजी से बढ़ रहा है और उनके सामने सबसे बड़ी चिंता अपने परिवार और सामान को सुरक्षित रखने की है। जिन लोगों के मकान नदी के बेहद करीब हैं, वे भी सुरक्षित स्थान की तलाश में हैं।
शुक्रवार को लेखपाल पंकज सिंह और नायब तहसीलदार हसीन ने कटान प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण किया था। अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। ग्रामीणों ने निरीक्षण के दौरान भी प्रशासन से कटान प्रभावित परिवारों के लिए तत्काल सुरक्षित व्यवस्था कराने की मांग की।
लगातार तेज हो रहे कटान और बढ़ते जलस्तर के कारण गांव के लोगों की चिंता बढ़ती जा रही है। एक तरफ गंगा का पानी संपर्क मार्गों तक पहुंच रहा है, वहीं दूसरी ओर नदी का कटान आबादी के लिए सीधा खतरा बन गया है। चार पक्के मकानों और दो झोपड़ियों के गंगा में समाने के बाद ग्रामीणों को अब अन्य मकानों की भी चिंता सता रही है। ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द प्रभावी कदम उठाकर उन्हें सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराने की मांग की है।


