खतरे के निशान से महज 15 सेंटीमीटर नीचे पहुंचा जलस्तर, कई गांवों में दोबारा घुसा बाढ़ का पानी; बुखार के मरीज बढ़ने से ग्रामीण परेशान
फर्रुखाबाद। गंगा नदी के जलस्तर में एक बार फिर तेजी से बढ़ोतरी होने से अमृतपुर क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। कुछ दिन पहले नदी का जलस्तर घटने से लोगों को राहत की उम्मीद जगी थी, लेकिन जलस्तर फिर बढ़कर 136.95 मीटर पर पहुंच गया। खतरे का निशान 137.10 मीटर है। ऐसे में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से महज 15 सेंटीमीटर नीचे रह गया है।
जलस्तर बढ़ने का असर आसपास के गांवों और संपर्क मार्गों पर भी दिखाई देने लगा है। कई गांवों में बाढ़ का पानी फिर से बढ़ गया है। ग्रामीणों के मुताबिक, घरों और रास्तों से पिछला पानी पूरी तरह निकल भी नहीं पाया था कि गंगा के बढ़ते जलस्तर ने उनकी मुश्किलें दोबारा बढ़ा दीं। घरों के आसपास पानी भरने के कारण लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
फर्रुखाबाद-बदायूं मार्ग पर एक फीट पान
गंगा का जलस्तर बढ़ने के साथ ही फर्रुखाबाद-बदायूं मार्ग पर भी पानी का दबाव बढ़ गया है। चित्रकूट डिप के पास सड़क पर करीब एक फीट पानी बह रहा है। यदि गंगा का जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो इस मार्ग पर आवागमन प्रभावित होने और सड़क के दोबारा बंद होने की आशंका बढ़ गई है।
मार्ग पर पानी आने से आसपास के ग्रामीणों की आवाजाही मुश्किल हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि जलस्तर कम होने के बाद उन्हें लगा था कि अब बाढ़ से राहत मिलेगी और जनजीवन सामान्य होने लगेगा, लेकिन पानी फिर बढ़ने से उनकी परेशानियां लौट आई हैं।
घरों और रास्तों में फिर भरने लगा पानी
बाढ़ प्रभावित गांवों में नदी का पानी फिर बढ़ने से ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कई स्थानों पर घरों और रास्तों में पानी जमा होने लगा है। ग्रामीणों के अनुसार, अभी बाढ़ का पिछला पानी पूरी तरह निकल भी नहीं पाया था और अब दोबारा जलभराव शुरू हो गया है।
पानी बढ़ने से दैनिक जरूरतों के लिए बाहर निकलना भी चुनौती बन गया है। ग्रामीणों को आने-जाने के लिए पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है। लगातार जलस्तर बढ़ने की स्थिति में हालात और बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है।
बाढ़ प्रभावित गांवों में बढ़े बुखार के मरीज
बाढ़ का पानी बढ़ने के साथ ही स्वास्थ्य संबंधी चिंता भी सामने आने लगी है। क्षेत्र के कई गांवों में बुखार से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ने की बात सामने आई है।
तीसराम की मड़ैया, उदयपुर, सुंदरपुर, नगला दुर्गू, हरिसिंहपुर कायस्थ, सैदापुर, ऊगरपुर, मंझा, रतनपुर, भाऊपुर चौरासी, कछुआ गाढ़ा और राजाराम की मड़ैया समेत कई गांवों में लोगों के बुखार से पीड़ित होने की जानकारी दी गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि गांवों में स्वास्थ्य टीम नहीं पहुंचने के कारण बीमार लोगों को इलाज के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है। कई लोग स्थानीय स्तर पर दवा लेने को मजबूर हैं। बाढ़ की स्थिति के बीच स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता ग्रामीणों के लिए बड़ी चिंता बनी हुई है।
नरौरा बांध से छोड़ा गया 87,053 क्यूसेक पानी
गंगा के बढ़ते जलस्तर के बीच नरौरा बांध से 87,053 क्यूसेक पानी छोड़े जाने की जानकारी सामने आई है। पानी छोड़े जाने और नदी के बढ़ते जलस्तर के चलते निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है।
ग्रामीण लगातार नदी के जलस्तर पर नजर बनाए हुए हैं। उनका कहना है कि यदि जलस्तर खतरे के निशान के पार पहुंचता है तो निचले इलाकों में बाढ़ की स्थिति और गंभीर हो सकती है।
रामगंगा नदी का जलस्तर भी बढ़ा
गंगा के साथ-साथ रामगंगा नदी के जलस्तर में भी वृद्धि दर्ज की गई है। रामगंगा का चेतावनी बिंदु 136.60 मीटर है, जबकि शनिवार को इसका जलस्तर बढ़कर 136.45 मीटर पहुंच गया। इससे रामगंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु से महज 15 सेंटीमीटर नीचे रह गया है।
इससे पहले रामगंगा का जलस्तर 136.15 मीटर था, जिसमें 30 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई। वहीं, खोह, हरेली और रामनगर बैराज से कुल 15,393 क्यूसेक पानी छोड़े जाने की जानकारी है।
राहत की उम्मीदों पर फिर पान
कुछ दिन पहले गंगा का जलस्तर कम होने से ग्रामीणों को उम्मीद थी कि अब बाढ़ की स्थिति से धीरे-धीरे राहत मिल जाएगी। लोग घरों और रास्तों से पानी निकलने का इंतजार कर रहे थे। लेकिन जलस्तर दोबारा बढ़ने से उनकी उम्मीदों पर पानी फिर गया है।
ग्रामीणों के सामने अब एक साथ कई चुनौतियां हैं—बढ़ता जलस्तर, रास्तों में पानी, आवागमन की समस्या और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बढ़ती बीमारी। ग्रामीणों की मांग है कि प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य टीम भेजी जाए और बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रशासन की ओर से आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं।
आगे की चुनौती
गंगा का जलस्तर यदि 137.10 मीटर के खतरे के निशान के करीब या उससे ऊपर पहुंचता है, तो अमृतपुर क्षेत्र के निचले इलाकों में स्थिति और गंभीर हो सकती है। फिलहाल ग्रामीण नदी के जलस्तर में होने वाले हर बदलाव पर नजर रखे हुए हैं। फर्रुखाबाद-बदायूं मार्ग पर पानी का बढ़ना भी आने वाले समय में प्रशासन और ग्रामीणों के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।


