यूडीडीए ने छह जिलों के 84 गांवों के लिए जारी किए दिशा-निर्देश, जिले के 46 गांव शामिल
फर्रुखाबाद। गंगा एक्सप्रेसवे को आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे से जोड़ने की दिशा में भूमि खरीद की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) ने 4 सितंबर 2025 को जारी पत्र में इटावा, कन्नौज, मैनपुरी, फर्रुखाबाद, हरदोई और शाहजहांपुर के प्रभावित गांवों में भूमि खरीद के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। दस्तावेज के अनुसार परियोजना से छह जिलों की आठ तहसीलों के कुल 84 गांव प्रभावित हैं।
जिले में फर्रुखाबाद सदर और अमृतपुर तहसील के 46 गांव परियोजना से प्रभावित बताए गए हैं। यह संख्या छह जिलों में सबसे अधिक है। कन्नौज के एक, इटावा के दो, मैनपुरी के 26, हरदोई के छह और शाहजहांपुर के तीन गांव भी परियोजना में शामिल हैं।
यूपीडा ने निर्देश दिया है कि भूमि खरीद के लिए बैनामा निष्पादित करने से पहले यह सुनिश्चित किया जाए कि संबंधित भूमि पूर्व में जमींदारी विनाश अधिनियम की धारा-132 से प्रभावित न रही हो। साथ ही अधिसूचित क्षेत्रफल से अधिक भूमि की खरीद नहीं की जाएगी।
बैनामे में खरीदी जाने वाली भूमि के गाटे की स्पष्ट चौहद्दी, गाटा संख्या, चकमार्ग, संपर्क मार्ग, जनपदीय मार्ग और राष्ट्रीय राजमार्ग जैसी जानकारियां दर्ज करने को कहा गया है। भूमि का प्रकार, तहसील, संपत्ति का विवरण, सर्किल दर और खरीद मूल्य भी स्पष्ट रूप से अंकित करना होगा।
दिशा-निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि बैनामा निष्पादन के बाद निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार भूमि का अमलदरामद यूपीडा के पक्ष में किया जाए। खसरे में भी यूपीडा संरक्षण में आने वाले गाटे और संबंधित खसरे का स्पष्ट अंकन करने के निर्देश दिए गए हैं।
भूमि खरीद में आयकर नियमों का पालन करने और पात्र मामलों में आयकर अधिनियम की धारा 194एलए अथवा 194आईए के तहत कटौती की प्रक्रिया अपनाने को भी कहा गया है। तहसील स्तर पर परियोजना से संबंधित धनराशि का अलग हिसाब रखने सहित आवश्यक वित्तीय अभिलेखों के रखरखाव के निर्देश दिए गए हैं।
यूपीडा ने भूमि खरीद की प्रक्रिया में निर्धारित प्रारूप के अनुसार बैनामा कराने पर जोर दिया है। भुगतान से पहले संबंधित अधिकारियों को आवश्यक अभिलेखों की जांच करनी होगी। इनमें प्रस्ताव की प्रति, हिस्सा/अंश प्रमाणपत्र, खतौनी की प्रति, 41 व 45 की छाया प्रति, चेक पासबुक की प्रमाणित प्रति, बैनामा की प्रति, निवास प्रमाणपत्र और अन्य आवश्यक दस्तावेज शामिल हैं।
परियोजना के तेजी से संचालन के लिए यूपीडा ने प्रभावित जिलों और तहसीलों को अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी तय की है। पत्र के अनुसार प्रत्येक प्रभावित जिले को लेखन सामग्री के लिए 40 हजार रुपये उपलब्ध कराए जाएंगे। प्रत्येक प्रभावित तहसील में शुरुआती तीन माह के लिए कंप्यूटर ऑपरेटर के लिए 14 हजार रुपये प्रतिमाह तथा वाहन चालक सहित वाहन एवं डीजल के लिए 35 हजार रुपये प्रतिमाह देने की व्यवस्था की गई है।
इसके अलावा तहसील स्तर पर अलमारी के लिए 12 हजार रुपये तक की व्यवस्था तथा प्रभावित जिलों और तहसीलों में कंप्यूटर, प्रिंटर और फोटो कॉपी मशीन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने का भी प्रावधान किया गया है।


