पंखों के बाद अब झाड़ू-टब से निकाला जा रहा पानी
उन्नाव। लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की बदहाल व्यवस्था अब सरकारी और निर्माण एजेंसी के इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। सड़क की जलनिकासी व्यवस्था ध्वस्त होने के बाद बारिश का पानी निकालने के लिए आधुनिक मशीनों की जगह झाड़ू और प्लास्टिक के टब का सहारा लिया जा रहा है। इससे पहले पैचवर्क और मिट्टी सुखाने के लिए सड़क पर बड़े-बड़े पंखे लगाए जाने का मामला सामने आ चुका है।
रविवार को कोरारी गांव के पास किलोमीटर संख्या 61.9 समेत दो स्थानों पर महिला श्रमिक झाड़ू लगाकर सड़क पर जमा पानी को टब से बाहर निकालती नजर आईं। एक्सप्रेसवे की दुर्दशा का यह दृश्य व्यवस्था की पोल खोलता नजर आया।
जांच में एक्सप्रेसवे की ड्रेनेज व्यवस्था के ध्वस्त होने की बात सामने आ चुकी है। हालात इतने खराब हैं कि बारिश के पानी की निकासी नहीं हो पा रही है। वहीं, दो स्थानों पर पुलिया के ऊपर सड़क धंसने की बात भी सामने आई है। सड़क में दरारों ने यात्रियों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि करोड़ों रुपये की लागत से बने एक्सप्रेसवे पर जलनिकासी जैसी बुनियादी व्यवस्था क्यों चरमरा गई? क्या जिम्मेदारों को इसकी भनक नहीं थी या फिर शिकायतों और खामियों को नजरअंदाज किया जाता रहा?
निर्माण एजेंसी पीएनसी इन्फ्राटेक के प्रोजेक्ट मैनेजर विनोद चौहान से मामले में प्रतिक्रिया लेने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका फोन नहीं उठा। एक्सप्रेसवे की हालत देखकर अब यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि पंखों और झाड़ू-टब के जुगाड़ से आखिर कब तक करोड़ों की सड़क को बचाया जाएगा


