लखनऊ। जिला कोर्ट के आसपास बने कथित अवैध चैंबरों को ध्वस्त करने की नगर निगम की कार्रवाई रविवार को टल गई। नगर निगम की टीम को दोपहर बाद चैंबरों पर बुलडोजर चलाना था, लेकिन वकीलों की ओर से 14 आपत्तियां दाखिल किए जाने के बाद कार्रवाई रोक दी गई। इन आपत्तियों पर कई वकीलों के सामूहिक हस्ताक्षर बताए गए हैं।
नगर निगम अधिकारियों के मुताबिक, आपत्तियों का नियमानुसार निस्तारण किया जाएगा। इसके बाद ही आगे की कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि रविवार को पर्याप्त पुलिस बल उपलब्ध नहीं होने के कारण भी अभियान को आगे बढ़ाना संभव नहीं हो सका। कोर्ट के निर्देश के अनुसार पहले आपत्तियां लेने और उनका निस्तारण करने के बाद ही कार्रवाई की जानी है। अधिकारियों के अनुसार, आपत्तियों का जल्द निस्तारण कर अगली छुट्टी के दिन अभियान चलाया जा सकता है।
नगर निगम की टीम ने कार्रवाई की तैयारी के तहत चिह्नित चैंबरों पर क्रॉस के निशान लगाए हैं। करीब 200 चैंबरों को कार्रवाई के लिए चिह्नित किए जाने की बात सामने आई है।
एक सप्ताह में कब्जा हटाने का दिया था समय
नगर निगम ने हाईकोर्ट के आदेश के बाद 22 सितंबर को नोटिस जारी कर संबंधित लोगों को आपत्ति दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया था। साथ ही स्वयं कब्जा हटाने के लिए 3 अक्टूबर तक की समयसीमा निर्धारित की गई थी। नोटिस में यह भी चेतावनी दी गई थी कि निर्धारित समय में कब्जा नहीं हटाने पर नगर निगम की ओर से कार्रवाई की जाएगी और कब्जा हटाने में आने वाला खर्च भी संबंधित लोगों से वसूला जा सकता है।
नगर निगम की कार्रवाई के विरोध में कुछ वकील पिछले कई दिनों से स्वास्थ्य भवन चौराहे पर प्रदर्शन कर रहे हैं। उनकी मांग है कि चैंबर हटाने से पहले उन्हें वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराया जाए। शनिवार को कुछ वकीलों ने नगर निगम कार्यालय पहुंचकर आपत्तियां दाखिल कीं, जबकि कुछ ने न्यायालय के माध्यम से भी आपत्ति संबंधी नोटिस भेजे।
इससे पहले भी 17 मई और 30 अगस्त को वकीलों के कई चैंबरों पर कार्रवाई की जा चुकी है। अब 14 आपत्तियों के निस्तारण और पुलिस बल की उपलब्धता के बाद नगर निगम की अगली कार्रवाई तय होगी।


