गजेवर एयरपोर्ट जैसी महत्वाकांक्षी परियोजना केवल कंक्रीट, रनवे और टर्मिनल भवन का निर्माण नहीं है। यह उत्तर प्रदेश की बदलती औद्योगिक और आर्थिक तस्वीर का प्रतीक है। ऐसे में यदि बारिश के दौरान इसके परिसर में करीब 30 मिनट तक जलभराव की स्थिति सामने आती है, तो इसे महज एक छोटी तकनीकी घटना कहकर नजरअंदाज करना उचित नहीं होगा।
बताया गया है कि करीब 11 हजार करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना में बारिश के बाद कुछ हिस्सों में पानी जमा हुआ। पानी कुछ समय बाद निकल गया हो, लेकिन इस घटना ने एक महत्वपूर्ण सवाल जरूर खड़ा किया है—क्या इतनी बड़ी परियोजना की जलनिकासी व्यवस्था को स्थानीय मौसम और भविष्य में आने वाली भारी बारिश की संभावनाओं के अनुरूप तैयार किया गया है?
यहां सवाल किसी एक अधिकारी, कंपनी या निर्माण एजेंसी पर आरोप लगाने का नहीं, बल्कि उस पूरी व्यवस्था की परीक्षा का है, जिस पर करोड़ों लोगों की उम्मीदें टिकी हैं।
किसी भी निर्माणाधीन अथवा नए विकसित परिसर में बारिश के दौरान कुछ स्थानों पर पानी जमा होना असंभव नहीं है। इसलिए केवल जलभराव की एक घटना के आधार पर निर्माण गुणवत्ता पर सवालिया निशान लगाना तकनीकी रूप से उचित नहीं होगा।
लेकिन दूसरी तरफ, इतनी महत्वपूर्ण परियोजना में सामने आई ऐसी घटना को नजरअंदाज करना भी उतना ही गलत होगा।
दरअसल, किसी एयरपोर्ट की सफलता केवल यह नहीं है कि वहां विमान सुरक्षित उतर जाएं। उसकी सफलता इस बात में भी है कि भारी बारिश, जलभराव, विद्युत व्यवस्था, यातायात, अग्निसुरक्षा और आपात परिस्थितियों में पूरा सिस्टम कितनी मजबूती से काम करता है।
जेवर एयरपोर्ट आने वाले वर्षों में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के आर्थिक विकास का बड़ा केंद्र बनने की उम्मीद जगाता है। ऐसे में मानसून की पहली गंभीर परीक्षा को एक चेतावनी मानकर कमियों को अभी दूर करना अधिक समझदारी होगी।
सबसे पहले यह स्पष्ट होना चाहिए कि जलभराव वास्तव में कहां हुआ, कितनी मात्रा में पानी जमा हुआ, बारिश की तीव्रता कितनी थी और पानी की निकासी में कितना समय लगा।
इसके साथ यह भी देखा जाना चाहिए कि एयरपोर्ट के ड्रेनेज नेटवर्क की डिजाइन क्षमता कितनी है और वह कितनी तीव्र बारिश को संभाल सकता है। क्या मुख्य नालियों और आउटलेट की क्षमता पर्याप्त है? क्या कहीं पानी के प्राकृतिक बहाव में रुकावट है? क्या पंपिंग सिस्टम जरूरत के अनुरूप काम कर रहा है? क्या निर्माण के दौरान अस्थायी जलनिकासी व्यवस्था पर्याप्त है?
राजनीतिक बयानबाजी से नहीं, बल्कि स्वतंत्र तकनीकी ऑडिट से मिलना चाहिए।
बड़ी परियोजनाओं में छोटी कमियां समय रहते दूर करना आसान होता है। लेकिन वही कमी यदि एयरपोर्ट के संचालन के बाद सामने आती है तो उसका असर कहीं बड़ा हो सकता है।
कल्पना कीजिए कि भविष्य में अत्यधिक बारिश के दौरान एयरपोर्ट के पहुंच मार्ग, पार्किंग, टर्मिनल के आसपास के क्षेत्र या अन्य महत्वपूर्ण हिस्सों में पानी जमा हो जाए। इससे यात्रियों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है, परिचालन व्यवस्था पर दबाव पड़ सकता है और परियोजना की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठ सकते हैं।
इसलिए अभी से यह सुनिश्चित करना होगा कि ‘पानी आया और आधे घंटे में निकल गया’ जैसी सोच बड़े बुनियादी ढांचे के लिए पर्याप्त न मानी जाए। असली सवाल यह होना चाहिए कि ऐसी स्थिति दोबारा न बने और यदि असाधारण बारिश हो भी जाए तो सिस्टम उसके लिए तैयार रहे।
सरकार और परियोजना से जुड़े अधिकारियों को इस घटना पर रक्षात्मक रवैया अपनाने के बजाय तथ्य सार्वजनिक करने चाहिए। बारिश की मात्रा, प्रभावित क्षेत्र, जलभराव की अवधि और निकासी व्यवस्था की क्षमता जैसे तकनीकी आंकड़े सामने आएं तो जनता भी वास्तविक स्थिति समझ सकेगी।
यदि कोई कमी मिली है तो उसे स्वीकार कर तत्काल सुधार किया जाना चाहिए। इससे परियोजना की छवि कमजोर नहीं होगी, बल्कि उसकी विश्वसनीयता मजबूत होगी।
जेवर एयरपोर्ट केवल एक हवाई अड्डा नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के विकास की बड़ी तस्वीर का हिस्सा है। इसलिए इसकी गुणवत्ता, सुरक्षा और दीर्घकालिक उपयोगिता से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं होना चाहिए।
जेवर एयरपोर्ट में करीब 30 मिनट का जलभराव अपने आप में किसी बड़े संकट का प्रमाण नहीं है, लेकिन यह निश्चित रूप से एक जरूरी चेतावनी है। हजारों करोड़ रुपये की परियोजना में हर ऐसी घटना को भविष्य की संभावित समस्या से पहले मिलने वाले संकेत के रूप में देखना चाहिए।
सरकार, प्रशासन और निर्माण एजेंसी के सामने अब सबसे बेहतर रास्ता यही है कि घटना की तकनीकी और निष्पक्ष जांच कराई जाए, ड्रेनेज सिस्टम का स्ट्रेस टेस्ट कराया जाए और जो भी कमियां सामने आएं, उन्हें एयरपोर्ट के पूर्ण संचालन से पहले दूर किया जाए।
क्योंकि जेवर एयरपोर्ट से देश और प्रदेश को सिर्फ एक आधुनिक हवाई अड्डे की उम्मीद नहीं है,उम्मीद एक ऐसे विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचे की है, जो बारिश जैसी प्राकृतिक चुनौती के सामने भी उतना ही मजबूत दिखाई दे जितना कागज पर दिखाई देता है।


