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Wednesday, August 12, 2026

11 सौ करोड़ के जेवर एयरपोर्ट में 30 मिनट का जलभराव, ड्रेनेज व्यवस्था की खुली पोल

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थोड़ी देर की बारिश में पानी भरने से निर्माण गुणवत्ता और जलनिकासी व्यवस्था पर उठे सवाल

ग्रेटर नोएडा। करीब 11 सौ करोड़ की लागत वाले जेवर एयरपोर्ट में जलभराव की घटना ने परियोजना की ड्रेनेज और निर्माण व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। बताया जा रहा है कि एयरपोर्ट परिसर के कुछ हिस्सों में करीब 30 मिनट तक पानी जमा रहा।
मामला भले ही कुछ देर का बताया जा रहा हो, लेकिन इतनी बड़ी और महत्वाकांक्षी परियोजना में जलभराव की स्थिति सामने आने के बाद इसकी जलनिकासी व्यवस्था और बारिश के पानी के प्रबंधन को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
जेवर एयरपोर्ट को आधुनिक सुविधाओं से लैस बड़े अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के रूप में विकसित किया जा रहा है। ऐसे में मानसून के दौरान परिसर में पानी के ठहराव को रोकना परियोजना की आधारभूत तैयारियों का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
जलभराव की घटना को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या एयरपोर्ट की ड्रेनेज प्रणाली भारी बारिश के दबाव को संभालने के लिए पर्याप्त है। यदि निर्माणाधीन या परिचालन क्षेत्र में पानी जमा हुआ है तो विशेषज्ञों के स्तर पर इसकी तकनीकी जांच जरूरी होगी।
हालांकि, सिर्फ 30 मिनट के जलभराव की घटना के आधार पर निर्माण गुणवत्ता में खामी का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगा। वास्तविक स्थिति का आकलन बारिश की तीव्रता, प्रभावित क्षेत्र, जलनिकासी की क्षमता और पानी निकलने में लगे समय के तकनीकी आंकड़ों से ही किया जा सकता है।
फिलहाल इस घटना ने जेवर एयरपोर्ट की ड्रेनेज प्लानिंग, बारिश के पानी की निकासी और मानसून तैयारियों को लेकर निगरानी बढ़ाने की जरूरत जरूर सामने ला दी है।

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