लखनऊ। देश में ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ (एक देश, एक चुनाव) व्यवस्था लागू करने की दिशा में प्रक्रिया तेज हो गई है। इस संबंध में गठित संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी ) की तीन दिवसीय बैठक लखनऊ में आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न राजनीतिक दलों, जनप्रतिनिधियों, संवैधानिक विशेषज्ञों, प्रशासनिक अधिकारियों, उद्योग जगत, शिक्षाविदों और अन्य हितधारकों से विस्तृत चर्चा कर सुझाव लिए गए।
जेपीसी के अध्यक्ष पी.पी. चौधरी ने कहा कि समिति का लक्ष्य आवश्यक कानूनी और संवैधानिक प्रक्रिया पूरी कर 2029 के लोकसभा चुनाव तक ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ व्यवस्था लागू करने का है। उन्होंने स्पष्ट किया कि समिति पूरे देश में संवाद कर व्यापक सहमति बनाने का प्रयास कर रही है और प्राप्त सुझावों के आधार पर अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार करेगी।
बैठक के दौरान उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने भी अपने विचार रखे। समिति ने राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों, मुख्य निर्वाचन अधिकारी, विधि विशेषज्ञों तथा अन्य संबंधित पक्षों के साथ भी चर्चा की। उद्देश्य यह जानना था कि यदि लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ कराए जाएं तो उसके लिए किन संवैधानिक, प्रशासनिक और व्यावहारिक बदलावों की आवश्यकता होगी।
पी.पी. चौधरी ने कहा कि बार-बार चुनाव होने से सरकारी मशीनरी लंबे समय तक चुनावी प्रक्रिया में व्यस्त रहती है, जिससे विकास कार्य प्रभावित होते हैं। उनके अनुसार, एक साथ चुनाव होने से सरकारी खर्च में कमी आएगी, प्रशासनिक संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और शासन व्यवस्था अधिक प्रभावी बन सकेगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ का अर्थ पूरे देश में एक ही दिन मतदान कराना नहीं है, बल्कि लोकसभा और विधानसभा चुनावों को एक ही चुनावी चक्र में चरणबद्ध तरीके से संपन्न कराना है।
संयुक्त संसदीय समिति देशभर में अध्ययन दौरे कर विभिन्न राज्यों से सुझाव एकत्र कर रही है। लखनऊ में आयोजित यह बैठक उसी श्रृंखला का महत्वपूर्ण हिस्सा रही। समिति सभी पक्षों के सुझावों का अध्ययन करने के बाद अपनी रिपोर्ट संसद को सौंपेगी, जिसके आधार पर प्रस्तावित संवैधानिक संशोधनों पर आगे की प्रक्रिया तय होगी।
2029 तक लागू हो सकता है ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’, जेपीसी ने यूपी में सभी पक्षों से मांगे सुझाव


