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Tuesday, July 14, 2026

विदेश में भी लहराई सनातन की पताका, फ्रांस की धरती पर श्रद्धा और संगीत के बीच गूंजा सुन्दरकाण्ड पाठ

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फर्रुखाबाद। भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा की सुगंध अब केवल देश की सीमाओं तक ही सीमित नहीं रह गई है, बल्कि विदेशों में बसे भारतीय भी पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ अपनी धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए हुए हैं। इसी कड़ी में सुंदरकांड पाठ मंच, हनुमान बगिया मंच के तत्वावधान में फ्रांस में एक भव्य एवं भावपूर्ण सुन्दरकाण्ड पाठ का आयोजन किया गया। यह आयोजन विनीता दुबे के फ्रांस स्थित निवास पर सम्पन्न हुआ, जहां भक्ति, संगीत और आध्यात्मिक वातावरण ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।

हनुमान बगिया मंच के संचालक श्रीकांत दुबे के निर्देशन में आयोजित इस कार्यक्रम में विदेश की धरती पर सनातन संस्कृति की गौरवशाली परंपरा का जीवंत स्वरूप देखने को मिला। रामभक्तों ने सामूहिक रूप से सुन्दरकाण्ड का पाठ कर भगवान श्रीराम और हनुमान जी की भक्ति में स्वयं को समर्पित किया। पूरे आयोजन के दौरान भजन-कीर्तन और मंत्रोच्चार से वातावरण भक्तिमय बना रहा।

इस अवसर पर श्रीकांत दुबे ने कहा कि “हम सभी नारायण स्वरूप हैं। जीवन में प्रेम का विस्तार करें, लोभ का नहीं। विषय-वासनाओं का त्याग कर सेवा, समर्पण और सद्भाव को अपनाना ही मानव जीवन का वास्तविक उद्देश्य है।” उन्होंने कहा कि विदेश में रहने वाले भारतीयों ने राष्ट्रीय पर्व के अवसर पर सुन्दरकाण्ड पाठ के माध्यम से न केवल अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ाव बनाए रखा, बल्कि नई पीढ़ी को भी भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों से परिचित कराने का सराहनीय प्रयास किया।

उन्होंने बताया कि फ्रांस में बसे रामभक्तों ने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ आयोजन में भाग लिया। सामूहिक पाठ के दौरान उपस्थित श्रद्धालुओं ने विश्व शांति, मानव कल्याण और परिवारों की सुख-समृद्धि की कामना की। कार्यक्रम में भारतीय संस्कृति के प्रति लोगों का उत्साह देखते ही बनता था।

आयोजन को सफल बनाने में श्रीकांत दुबे, सुकीर्ति, श्यामकांत, विनीता, अनन्या तथा अगस्त्या दुबे सहित अनेक श्रद्धालुओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही। बड़ी संख्या में उपस्थित लोगों ने आयोजन की सराहना करते हुए इसे भारतीय संस्कृति के वैश्विक विस्तार का प्रेरणादायी उदाहरण बताया।

श्रीकांत दुबे ने फ्रांस प्रवास से लौटने के बाद इस आयोजन की जानकारी देते हुए बताया कि विदेश में रहने वाले भारतीय परिवार अपनी धार्मिक परंपराओं को पूरी निष्ठा के साथ निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति का संदेश विश्व बंधुत्व, प्रेम और मानवता का संदेश है, जिसे दुनिया के हर कोने तक पहुंचाने की आवश्यकता है।

उल्लेखनीय है कि श्रीकांत दुबे पिछले कई दशकों से फर्रुखाबाद में आध्यात्मिक जागरण और धार्मिक आयोजनों के माध्यम से समाज को जोड़ने का कार्य कर रहे हैं। हाल ही में वे फ्रांस में निवास कर रहे अपने पुत्र के पास प्रवास पर गए थे, जहां उनके मार्गदर्शन में आयोजित यह सुन्दरकाण्ड पाठ श्रद्धा, भक्ति और भारतीय संस्कृति के वैश्विक प्रसार का एक यादगार उदाहरण बन गया।

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